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Rajasthan: कैंसर में असरदार साबित हो रही पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, सरकारी योजना में फ्री मिल रही लाखों की महंगी दवाइयां

Cancer Treatment In Rajasthan: राजस्थान में कैंसर उपचार का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब मरीजों की जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ से इलाज किया जा रहा है, जिससे दवाएं ज्यादा असरदार साबित हो रही हैं और साइड इफेक्ट भी कम हो रहे हैं।

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जयपुर

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Akshita Deora

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विकास जैन

May 26, 2026

Cancer Medicine

फोटो: AI

Personalized Medicine Based On Genetic Profile: कैंसर उपचार में अब ‘सबके लिए एक जैसी दवा’ वाला मॉडल तेजी से बदल रहा है। राजस्थान में सरकारी स्तर पर मरीजों की जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ के आधार पर हर महीने 500 से अधिक मरीज इलाज करवा रहे हैं। इनमें लंग्स, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा हैं। राज्य में अभी सरकारी मॉलिक्यूलर लैब नहीं होने के बावजूद मरीज दिल्ली और मुंबई से जीन जांच करवाकर रिपोर्ट ला रहे हैं। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीज और कैंसर के प्रकार के अनुसार दवा तय कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक कीमोथैरेपी जहां शरीर की सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, वहीं टारगेट थैरेपी सीधे कैंसर कोशिकाओं पर असर करती है। इससे साइड इफेक्ट कम होते हैं और रिकवरी बेहतर रहती है। राजस्थान में बढ़ते कैंसर मामलों के बीच यह तकनीक आम और मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए नई उम्मीद बन रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मॉलिक्यूलर लैब शुरू हो जाएं तो हजारों मरीजों को सस्ता और समय पर इलाज मिल सकेगा। लंग्स कैंसर में ईजीएफआर, एएलके और आओएस1 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन, ब्रेस्ट कैंसर में एचईआर2 और बीआरसीए जीन तथा प्रोस्टेट कैंसर में मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग इलाज तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। यही वजह है कि अब कैंसर की पहचान केवल लक्षणों से नहीं, बल्कि जीन और गुणसूत्रों की जांच से की जा रही है। हाल ही में जयपुर से बाहर राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी इस तकनीक के प्रशिक्षण की शुरूआत की गई है।

देश में कैंसर प्रकार अनुमानित नए मरीज

  • ब्रेस्ट कैंसर 2.38 लाख
  • लंग्स कैंसर 74,763
  • प्रोस्टेट कैंसर 49,998
  • 2045 तक सालाना 24 लाख नए कैंसर के मरीज
  • प्रति 9 लोगों में 1 को जीवनकाल में कैंसर का खतरा
  • एक साल में देश में 15.5 लाख नए कैंसर केस अनुमानित
  • 2045 तक यह आंकड़ा 24 लाख पार पहुंचने की आशंका

पर्सनलाइज्ड मेडिसिन में क्या होता है?

  • जीन और म्यूटेशन की जांच
  • कैंसर की सटीक पहचान
  • मरीज के अनुसार दवा चयन
  • टारगेट थैरेपी
  • कम साइड इफेक्ट और बेहतर रिकवरी

सबसे ज्यादा फायदा इन कैंसर में

  • लंग्स, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, ब्लड, ओवरी कैंसर

बड़ी चुनौती

  • राजस्थान में सरकारी मॉलिक्यूलर लैब का अभाव
  • जीन टेस्ट के लिए दिल्ली और मुंबई पर निर्भरता

राहत की बात

  • आरजीएचएस और चिरंजीवी जैसी योजनाओं में महंगी दवाएं उपलब्ध
  • कई मरीजों को 2-4 लाख रुपए तक की दवाएं मुफ्त मिल रहीं

प्रतिदिन 10 से ज्यादा मरीज ले रहे इलाज

संस्थान में प्रतिदिन 10 से ज्यादा मरीज पर्सनलाइज्ड मेडिसिन से इलाज ले रहे हैं। मरीज जीन जांच करवाकर रिपोर्ट लाते हैं और उसी आधार पर सरकारी योजनाओं में लाखों रुपए की दवाएं मुफ्त उपलब्ध करवाई जाती हैं। निजी बाजार में इन दवाओं की कीमत दो लाख से चार लाख रुपए या उससे अधिक तक पहुंच जाती है।

डॉ. संदीप जसूजा, अधीक्षक, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट