Raipur Municipal Corporation Budget: रायपुर नगर निगम की आज होने वाली सामान्य सभा में महापौर मीनल चौबे अपना दूसरा बजट पेश करेंगी, जो इस बार लगभग 1600 करोड़ रुपये का अनुमानित है।
Raipur Municipal Corporation Budget: छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम की आज होने वाली सामान्य सभा में महापौर मीनल चौबे अपना दूसरा बजट पेश करेंगी, जो इस बार लगभग 1600 करोड़ रुपये का अनुमानित है। सभा की शुरुआत एक घंटे के प्रश्नकाल से होगी, जिसमें कुल 22 पार्षदों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।
इनमें से 15 सवाल भाजपा पार्षदों के हैं, जिससे अपने ही दल के पार्षद महापौर को सीधे घेर सकते हैं और उनके बजट प्रस्तावों पर चुनौती खड़ी कर सकते हैं। इसके अलावा भाजपा के 5 जोन अध्यक्ष भी सवालों के साथ सक्रिय रहेंगे, जिससे सवालों की तीव्रता और बढ़ सकती है।
इस सवाल-जवाब के दौर में पार्षद शहर की विकास योजनाओं, वित्तीय प्राथमिकताओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर महापौर और निगम प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगेंगे, जिससे सभा में राजनीतिक हंगामा और जोरदार बहस के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद भी शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सभा में उठाने की तैयारी में हैं। विशेष रूप से कांग्रेस पार्षद साइंस कॉलेज चौपाटी पर 9 करोड़ रुपये खर्च का पूरा हिसाब मांग सकते हैं और इसे बजट समीक्षा का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं। इससे निगम प्रशासन को पिछले खर्चों और उनके प्रभावों पर स्पष्ट जवाब देना होगा, जबकि पार्षद शहर के विकास और सार्वजनिक सुविधाओं की जवाबदेही पर जोर देंगे।
सभा में पार्षद निगम से कई अहम मुद्दों पर जवाब मांग सकते हैं, जिनमें प्रॉपर्टी टैक्स और पानी सप्लाई की स्थिति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कार्यप्रणाली, आवारा कुत्तों की समस्या और कचरा कलेक्शन की व्यवस्था, गार्डनों की बदहाल स्थिति, साथ ही तालाब सौंदर्याकरण और अधूरे निर्माण कार्य शामिल हैं।
इन सभी विषयों को लेकर पार्षद महापौर के सामने सीधे सवाल खड़े करेंगे, जिससे निगम प्रशासन को अपने कार्यों की जवाबदेही साबित करनी होगी। इस बार के प्रश्नकाल में पार्षदों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दे न केवल निगम के कामकाज पर सवाल उठाएंगे बल्कि बजट की प्राथमिकताओं और शहर के विकास के दिशा-निर्देशों पर भी प्रकाश डालेंगे। हालाँकि, विभिन्न दलों के पार्षदों के बीच मतभेद और सवालों की तीव्रता के चलते सभा में हंगामे के संकेत भी नजर आ रहे हैं, जो महापौर और निगम प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।