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अब घर Safe नहीं! छत्तीसगढ़ में घरेलू हिंसा से महिलाएं, बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान, आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन

NCRB Chhattisgarh Data: NCRB 2024 की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में महिलाओं पर क्रूरता के 8 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं, जबकि साइबर अपराध और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में भी बढ़ोतरी हुई है।

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Chhattisgarh Domestic Violence

Chhattisgarh Domestic Violence(photo-patrika

Chhattisgarh Domestic Violence: छत्तीसगढ़ में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। घर की चारदीवारी से लेकर बाहर तक महिलाएं और बुजुर्ग प्रताड़ना, हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की हालिया रिपोर्ट ने प्रदेश की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में महिलाओं पर घरेलू हिंसा और क्रूरता के 8 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं साइबर अपराध के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं।

NCRB Chhattisgarh Data: महिलाओं पर अत्याचार के 8601 मामले दर्ज

NCRB के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 8601 मामले दर्ज किए गए। इनमें घरेलू हिंसा, शारीरिक प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और अन्य प्रकार के अपराध शामिल हैं। यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में महिलाओं के खिलाफ 8035 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2022 में यह संख्या 8693 तक पहुंच गई थी। यानी महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ लगातार गंभीर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू विवाद, आर्थिक तनाव, शराबखोरी, पारिवारिक असंतुलन और सामाजिक दबाव जैसे कारण घरेलू हिंसा की बड़ी वजह बन रहे हैं।

घरेलू हिंसा के साथ साइबर अपराध भी बढ़े

रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में भी इजाफा दर्ज किया गया है। वर्ष 2024 में राज्य में महिलाओं से जुड़े 359 साइबर क्राइम के मामले सामने आए। इन मामलों में सोशल मीडिया पर उत्पीड़न, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फर्जी प्रोफाइल बनाना, साइबर बुलिंग, अश्लील मैसेज भेजना और एक्सटॉर्शन जैसी घटनाएं शामिल हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ महिलाओं को अब केवल घर या समाज में ही नहीं बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपराध का सामना करना पड़ रहा है।

घर के भीतर ही सबसे ज्यादा असुरक्षित महिलाएं

सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक अधिकांश घरेलू हिंसा के मामले परिवार और रिश्तों के भीतर से सामने आते हैं। कई महिलाएं सामाजिक दबाव, आर्थिक निर्भरता और परिवार टूटने के डर से शिकायत दर्ज नहीं करातीं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मामलों में हिंसा केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी की जाती है। लगातार अपमान, धमकी, खर्च पर नियंत्रण और सामाजिक रूप से अलग-थलग करना भी घरेलू हिंसा का हिस्सा है।

बुजुर्ग भी बन रहे हिंसा और प्रताड़ना के शिकार

NCRB रिपोर्ट में बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है। वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों पर अपराध के 1859 मामले दर्ज किए गए। इनमें संपत्ति विवाद, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक शोषण और परिवार द्वारा उपेक्षा जैसे मामले शामिल हैं। कई बुजुर्ग अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती पारिवारिक संरचना और सामाजिक संवेदनशीलता में कमी के कारण बुजुर्गों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।

थानों में बुजुर्गों के लिए अलग हेल्प डेस्क नहीं

राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अधिकांश थानों में बुजुर्गों के लिए अलग हेल्प डेस्क की व्यवस्था नहीं है। इससे बुजुर्गों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बुजुर्ग थाने तक पहुंचने में असमर्थ रहते हैं, जबकि कुछ लोग डर और सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज ही नहीं करा पाते। सामाजिक संगठनों ने पुलिस थानों में वरिष्ठ नागरिक सहायता केंद्र बनाने की मांग की है।

प्रदेश में बुजुर्गों पर क्राइम रेट चिंताजनक

रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों पर अपराध का क्राइम रेट 92.8 फीसदी दर्ज किया गया है, जो चिंता का बड़ा विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले रहने वाले बुजुर्ग, आर्थिक रूप से निर्भर वरिष्ठ नागरिक और पारिवारिक विवादों से जूझ रहे बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

जागरूकता और सख्ती की जरूरत

महिलाओं और बुजुर्गों पर बढ़ते अपराधों को देखते हुए विशेषज्ञ जागरूकता अभियान, कानूनी सहायता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसे मामलों में पीड़ितों को तत्काल सहायता, काउंसलिंग और सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। साथ ही पुलिस और प्रशासन को भी संवेदनशीलता के साथ मामलों का समाधान करना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा केवल कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक मानसिकता से जुड़ा मुद्दा है। परिवारों में संवाद की कमी, तनाव और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति भी हिंसा को बढ़ावा दे रही है। वहीं साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया जागरूकता पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।