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Chhattisgarh Land Dispute: सोनेसिली भूमि विवाद में बड़ा खुलासा, तहसीलदार रिपोर्ट में जमीन शासकीय होने की पुष्टि

Revenue Department Report: ग्राम सोनेसिली की विवादित भूमि मामले में तहसीलदार गोबरा नवापारा की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भूमि पूरी तरह शासकीय है।

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रायपुर

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Laxmi Vishwakarma

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विनोद जैन

May 24, 2026

Chhattisgarh Land Dispute

सोनेसिली की विवादित भूमि शासकीय (फोटो सोर्स: पत्रिका)

@विनोद जैन/Chhattisgarh Land Dispute: गोबरा नवापारा। ग्राम सोनेसिली की विवादित भूमि मामले में तहसीलदार गोबरा नवापारा की जांच रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित भूमि पूरी तरह शासकीय है और वर्तमान में राजस्व रिकॉर्ड में “चराई मद” के रूप में दर्ज एवं सुरक्षित है। जांच में यह भी सामने आया कि आवेदकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज राजस्व अभिलेखों के विपरीत पाए गए।प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 1969-70 में उक्त भूमि पुराने खसरा नंबर 443 एवं 528 के रूप में शासकीय घास मद में दर्ज थी।

Chhattisgarh Land Dispute: 1969-70 से ही शासकीय भूमि के रूप में दर्ज

प्रतिवेदन के मुताबिक वर्ष 1969-70 में यह भूमि पुराने खसरा नंबर 443 और 528 के रूप में शासकीय घास मद में दर्ज थी। उस समय से यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में ही दर्ज रही। वर्ष 1970 में सामूहिक कृषि सहकारी समिति मर्यादित, सोनेसिली का पंजीयन हुआ था। इसके बाद समिति को भूमि का दखल भी दिया गया था। हालांकि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रही और बाद में विवाद शुरू हो गया।

1994-95 में फिर शासन के नाम दर्ज हुई भूमि

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1994-95 में तहसीलदार अभनपुर और अपर कलेक्टर के आदेश पर सहकारी समिति का कब्जा समाप्त कर दिया गया। इसके बाद भूमि को पुनः शासन के नाम दर्ज कर दिया गया। वर्तमान में खसरा नंबर 1018, 1136, 1137 और 1150 छत्तीसगढ़ शासन राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज हैं। वहीं खसरा नंबर 352 को शासकीय चराई मद में शामिल बताया गया है।

सहकारी समिति का पंजीयन भी निरस्त

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि संबंधित सहकारी समिति का पंजीयन 20 फरवरी 1995 को निरस्त कर दिया गया था, जिससे उसके अधिकार और कमजोर हो गए। राजस्व मंडल बिलासपुर ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि पर पट्टा आवंटन का अधिकार केवल राज्य शासन के पास होता है। इस आधार पर किसी अन्य पक्ष द्वारा पट्टा या दावे का अधिकार स्वतः सीमित हो जाता है।

Chhattisgarh Land Dispute: ग्राम पंचायत का विरोध

ग्राम पंचायत ने भी इस चराई भूमि पर किसी प्रकार का पट्टा देने का विरोध दर्ज कराया है। पंचायत का कहना है कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग और चराई के लिए सुरक्षित रहनी चाहिए। जांच में यह भी पाया गया है कि आवेदक पहले से ही ग्राम सोनेसिली में अलग भूमि के स्वामी हैं और वे भूमिहीन श्रेणी में नहीं आते। इस तथ्य ने उनके दावे को और कमजोर कर दिया है। मामला अब हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेश के बाद दोबारा नियमानुसार सुनवाई की प्रक्रिया में है। प्रशासन अब सभी रिकॉर्ड और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।