
Surguja MP in Engineering college Ambikapur (Photo- Patrika)
अंबिकापुर. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर (Government Engineering College Ambikapur) को बड़ी सौगात दी है। परिषद ने महाविद्यालय में एमबीए सहित कार्यरत पेशेवरों के लिए विशेष बीटेक और एमटेक पाठ्यक्रमों को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से सरगुजा संभाग के विद्यार्थियों और तकनीकी कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। अब तक विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग महाविद्यालय अंबिकापुर के नाम से संचालित संस्थान को आधिकारिक तौर पर शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय (जीईसी) अंबिकापुर नाम दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन ने इसे संस्थान की स्वतंत्र पहचान और तकनीकी शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
एआईसीटीई से मिली स्वीकृति के तहत महाविद्यालय (Engineering college Ambikapur) में एमबीए पाठ्यक्रम की 30 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। वहीं नौकरी पेशा तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष बीटेक एवं एमटेक कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।
विशेष बीटेक पाठ्यक्रम में सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और माइनिंग इंजीनियरिंग में 30-30 सीटें स्वीकृत हुई हैं। वहीं एमटेक में माइनिंग इंजीनियरिंग, पावर सिस्टम एंड कंट्रोल तथा स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में 15-15 सीटों की मंजूरी मिली है।
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर (Engineering college Ambikapur) प्रदेश का पहला शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय बन गया है। यहां एमबीए के साथ-साथ कार्यरत पेशेवरों के लिए एक साथ तीन-तीन विषयों में विशेष बीटेक और एमटेक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इन कोर्सों की कक्षाएं जुलाई 2026 से शुरु होंगी।
नई व्यवस्था से सरगुजा और आसपास के आदिवासी व दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा। अब उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कम होगा। नौकरी करते हुए तकनीकी शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलने से युवाओं की रोजगार क्षमता और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि यह उपलब्धि सांसद चिंतामणि महाराज के प्रयासों तथा अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर और पार्षद आलोक दुबे के सहयोग से संभव हो सकी है।
महाविद्यालय (Ambikapur Engineering college) के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राम नारायण खरे ने एआईसीटीई, राज्य शासन, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी जनप्रतिनिधियों, छात्र संगठनों और महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार जताया है।
Updated on:
20 May 2026 06:40 pm
Published on:
20 May 2026 06:27 pm
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