
रायपुर . पचपेड़ीनाका स्थित जिस राजधानी अस्पताल (Rajdhani hospital fire) में आगजनी के चलते 6 मरीजों की असमय मौत हो गई, उस अस्पताल के संचालकों का तीन दिन बाद भी टिकरापारा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पता नहीं लगा सकी है। मजे की बात है कि हाल ही में उस अस्पताल को कोरोना अस्पताल के तहत स्वास्थ्य विभाग ने ही रजिस्टर्ड किया था।
इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग (Chhattisgarh health department) अस्पताल के संचालकों का खुलासा नहीं कर रहा है और न पुलिस बता पा रही है। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज किया है, लेकिन अस्पताल के संचालकों के बारे में पता नहीं लगा सकी है। बता दें कि बीते शनिवार की शाम अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई थी। इससे एक मरीज बिस्तर में लेटे-लेटे ही जल गया था और पांच अन्य की दम घुटने की वजह से मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले की जांच के तहत अन्य विभागों से जानकारी मांगी है। इस बीच सोमवार को अस्पताल प्रबंधन दूसरी जगह इलाज शुरू करने की अनुमति मांगने के लिए सीएमएचओ कार्यालय पहुंच गया। सीएमचओ डॉ. मीरा बघेल ने प्रबंधन को स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल अभी सील है। वहां से एक सामान भी इधर-उधर नही किया जा सकता है। जब तक जांच पूरी नही हो जाती, इलाज की अनुमति नही दी सकती है।
पुलिस ने लिखा पत्र
राजधानी अस्पताल के मालिक और संचालकों की जानकारी लेने व जांच के लिए पुलिस को आधा दर्जन विभागों को पत्र लिखना पड़ रहा है। बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, फॉरेंसिक साइंस, फायर सेफ्टी, नगर निगम को पत्र लिखकर अस्पताल और उसमें हुई आगजनी से संबंधित जानकारी मांगी है। आशंका जताई जा रही है कि इन विभागों से जानकारी मिलने में कई दिन लग जाएंगे। पुलिस ने राजधानी अस्पताल को भी नोटिस जारी करके संचालकों का नाम पूछा है। उनकी जिम्मेदारियों की भी जानकारी मांगी गई है।
कौन क्या बताएगा
स्वास्थ्य विभाग-अस्पताल का रजिस्ट्रेशन, डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन, नर्सिंग होम एक्ट के तहत किसके नाम से रजिस्ट्रेशन, निरीक्षण रिपोर्ट आदि।
नगर निगम-अस्पताल की बिल्डिंग, टैक्स, एनओसी, पार्किंग आदि की अनुमति किसके नाम से बनी है?
बिजली विभाग-मीटर, बिजली फिटिंग, आगजनी की जांच रिपोर्ट आदि।
Read More : लोगों की मनमानी बन रही पुलिस के लिए चुनौती, Lockdown में भी न मास्क न मास्क न फिजिकल डिस्टेसिंग
फॉरेंसिक लैब-आग लगने कारण, आग कैसे लगी?
फायर सेफ्टी- अस्पताल में फायर सेफ्टी की व्यवस्था, उपकरण, स्टाफ की ट्रेनिंग कब दी?
पुलिस ने इनको दिया नोटिस
टिकरापारा थाना प्रभारी संजीव मिश्रा ने बताया कि राजधानी अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करके संचालकों के नाम की जानकारी मांगी गई है। नोटिस अस्पताल के एडमिनिस्टे्रटर अजीत सिंह को जारी किया गया है। बता दें कि पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धारा 304 ए के तहत अपराध दर्ज किया है। आधा दर्जन मरीजों की मौत के बाद यह धारा मामूली कार्रवाई साबित हो रही है।
एक जैसी घटना, फिर अपराध अलग-अलग कैसे?
वर्ष 2017 में गोलबाजार के तुलसी होटल में भीषण आग लग गई थी। इससे 5 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। होटल में छोटे-छोटे कमरे थे और फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं थी। और न ही आपातकाल में बचने के लिए खिड़की-दरवाजे व अन्य इंतजाम थे। इस मामले में पुलिस ने होटल संचालक पर गैरजमानती अपराध की धारा 304 दर्ज किया था। अब इसी तरह की घटना राजधानी अस्पताल में भी हुई है, जिसमें 6 मरीज लोग मर गए हैं। इसके बावजूद मामले में कोई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस ने धारा 304 ए के तहत ही अपराध दर्ज किया है।
-पुलिस ने अस्पताल को नोटिस भेजकर संचालकों के नाम की जानकारी मांगी है। पुलिस को कुछ लोगों के बारे में जानकारी मिली है, लेकिन कानूनी कार्रवाई के हिसाब से विधिवत नोटिस भेजकर जानकारी मांगी गई है। दस्तावेजों में संचालकों के नाम मिलने के बाद पुलिस एफआईआर और डायरी में आरोपियों का नाम दर्ज करेगी।
- अजय यादव, एसएसपी, रायपुर
मौतों की जांच अभी शुरू नहीं, टीम आज घटनास्थल का कर सकती है निरीक्षणटिकरापारा स्थित राजधानी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में लगी आग की जांच अभी शुरू भी नही हुई। मामले की जंाच के लिए डिप्टी कलेक्टर यूएस अग्रवाल के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। टीम में स्वास्थ्य विभाग के डॉ. अविनाश चतुर्वेदी, डॉ.एसके सिन्हा और डॉ. राकेश पटेल शामिल हैं। मंगलवार को टीम के घटनास्थल पर जाने की संभावना जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के एक उच्च अधिकारी के मुताबिक, डॉक्टरों के कोविड ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण जांच शुरू नही हो पा रही है।
मरीजों का दूसरी जगह इलाज शुरू करने की अनुमति मांगने के लिए पहुंचे थे, जिन्हें जांच पूरी होने तक मना कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ निर्णय लिया जाएगा। अपर कलेक्टर के नेतृत्व में टीम गठित हो गई है।
- डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ, रायपुर