वनवास के समय प्रभु श्रीराम ने किया था इस मंदिर का निर्माण, अब अस्तित्व खतरे में !
सुकमा । छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। राज्य के अंतिम छोर पर सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर और कोंटा से 10 किमी पहले इंजराम गांव पड़ता है। यह इंजरम गांव आंध्र प्रदेश में बन रहे पोलावरम बांध की चपेट में आ रहा है, बांध के बनने से पूरा गांव जलमग्न हो जाएगा। गांव से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता है कि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने अपने वन गमन के दौरान यहां कुछ समय गुजारा था। यदि ऐसा होता है तो बांध के डूबान में आने से प्रभु श्रीराम के पड़ाव की वे सारी निशानियां भी मिट जाएंगी।
हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वन गमन मार्ग पर पडऩे वाले स्थानों को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया है। इसके बाद श्रीराम के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं, शोधार्थियों व पुरातत्वविदों को खुशी के साथ ही यह चिंता यह सता रही है कि डुबान में आने के बाद यह स्मृतियां हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी। उन्होंने राज्य सरकार से इसे बचाने पहल की मांग भी की है। सुब्बाराव ने बताया कि 90 के दिल्ली के प्रो रामवतार शर्मा के द्वारा श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान की स्थापना की गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव द्वारा श्रीराम वनगमन के शोध हेतु 5 करोड़ की आर्थिक सहयोग भी किया गया था। उस समय उनके अलावा स्व एंकन्ना, महेंद्र सिंह, शिवप्रताप सिंह, संजय रेड्डी कुछ अन्य लोगों की एक समिति भी बनाई गई थी।
गांव का नाम हुआ सिंगनगुड़ा से इंजरम
मान्यताओं के अनुसार रामायण काल में ऋषि इंजी का आश्रम इस गांव में स्थित था। पूर्व में इंजराम गांव का नाम सिंगनगुड़ा था। श्रीराम के आने से गांव का नाम इंजराम पड़ा। ग्रामीण बताते हैं कि स्थानीय भाषा में 'इंजे राम वतोड़ ' यानी यहां राम आए थे। मान्यता यह भी है कि जब भी यहां मंदिर की स्थापना का काम शुरू किया जाता है तो काम करने वाले मजदूर व अन्य कारीगर बीमार पड़ जाते हैं। इसे राम की इच्छा मानकर खुले में छोड़ दिया गया है।
यह है मान्यता
अयोध्या से निकले श्रीराम ने वनगमन के दौरान सुकमा जिले के रामाराम गांव के बाद अगला पड़ाव इंजराम में बनाया था। यहां पहुंचकर उन्होंने भगवान शिव की प्रतिमा की स्थापना की थी। इसके प्रमाण राष्ट्रीय राजमार्ग से सौ मीटर की दूरी पर रामायण काल की बिखरी प्रतिमाओं के तौर पर नजर आते हैं।
राम का 119 वां स्थान
इंजरम निवासी पी सुब्बा राव ने बताया कि वनगमन के दौरान प्रभु श्रीराम ने रामाराम के बाद इंजराम में समय बिताया था। यह उनका 119 वां पड़ाव था। यहां शबरी नदी में स्नान करने के बाद उन्होंने भगवान शिव की प्रतिमा की स्थापना की थी। इंजरम के ग्रामीण इन मूर्तियों की आज भी पूजा करते हैं।
आज तक नहीं बनी छत
सुब्बाराव ने बताया कि कई प्रयासों के बावजूद आज तक यहां के शिवालय का छत नहीं बन पाया है। लगभग आधा दर्जन बार निर्माण शुरू करने के पहले मिस्त्री मजदूर बीमार पड़ गए।
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