रायपुर

शिवनाथ प्रदेश की सबसे प्रदूषित नदी, महानदी-हसदेव ‘डेंजर जोन’ में, CPCB की रिपोर्ट ने चौंकाया

Polluted Shivnath River: फैक्ट्रियों के जहर और शहरों की गंदगी ने जीवनदायिनी धाराओं का दम घोंट रहा है। शिवनाथ नदी देश की दूसरी श्रेणी की सबसे प्रदूषित 22 नदियों में शामिल हो गया है। देखिए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

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Apr 09, 2026
राजधानी की जीवन दायिनी खारुन नदी की हालत खराब है। नदी में नालों के मिलने से पानी दूषित हो गया है । ( Photo- Patrika )

Polluted Shivnath River: राहुल जैन. छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियां अब गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही हैं। महानदी, शिवनाथ, खारुन, अरपा, केलो और हसदेव जैसी प्रमुख नदियां, जो कभी प्रदेश की जल आपूर्ति, कृषि और जैव विविधता की आधारशिला थीं, आज तेजी से बढ़ते प्रदूषण की चपेट में हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की अक्टूबर 2025 में जारी रिपोर्ट ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

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Polluted Shivnath River: देश की 296 सर्वाधिक प्रदूषित नदी

रिपोर्ट के मुताबिक इन नदियों के कई हिस्से देश की 296 सर्वाधिक प्रदूषित नदी खंडों में शामिल हो चुके हैं। नालों का गंदा पानी, औद्योगिक अपशिष्ट और जलकुंभी का अनियंत्रित फैलाव नदियों को धीरे-धीरे डंपिंग यार्ड में बदल रहा है। इससे पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है, जिससे जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में है और पानी मानव उपयोग के लिए भी असुरक्षित होता जा रहा है।

नदियों में पनप रहे हानिकारक बैक्टीरिया

कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर है कि पानी से दुर्गंध आती है और उसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनप रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट न केवल पर्यावरण बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी बड़े खतरे में बदल सकता है। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की नदियां आने वाले समय में पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

शिवनाथ का हालत ज्यादा चिंताजनक

शिवनाथ नदी की स्थिति प्रदेश में सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई है। इसे प्रदूषण की दूसरी श्रेणी में रखा गया है, जिसमें देश की केवल 22 नदियां शामिल हैं। दुर्ग जिले के झेंझरी गांव के पास समोदा नाला क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक है। यहां भिलाई इस्पात संयंत्र का अपशिष्ट जल मिलने की बात सामने आई है। इस क्षेत्र में बीओडी 20.1 से 30.0 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जो पानी को बदबूदार और उपयोग के अयोग्य बनाता है।

ये नदियां आती हैं तीसरी श्रेणी में

सीपीसीबी के अनुसार 10.1 से 20.0 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी वाले नदी खंड तीसरी श्रेणी में आते हैं। इस श्रेणी में महानदी, हसदेव और खारुन शामिल हैं।

तीसरी श्रेणी में महानदी, हसदेव और खारुन
महानदी: खरौद से मांड नदी क्षेत्र तक प्रदूषण अधिक

हसदेव: चांपा के पास स्थिति गंभीर
खारुन: खपरी नाला क्षेत्र प्रभावित

ऐस बढ़ता है खतरा

उच्च बीओडी के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है।

अरपा और केलो की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

अरपा और केलो नदियों को पांचवीं श्रेणी में रखा गया है, जहां बीओडी 3 से 6 मिलीग्राम प्रति लीटर है। हालांकि इनकी स्थिति अन्य नदियों से बेहतर है, लेकिन बढ़ता प्रदूषण भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

अरपा: बिलासपुर के चेकडेम क्षेत्र में प्रदूषण
केलो: लहंगापाली पुल, मिडमिडा गांव के पास प्रभाव

कैसे मापा जाता है प्रदूषण

राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत सीपीसीबी नदियों की स्थिति का आकलन बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) से करता है।
वर्ग 1: 30 mg/L से अधिक (अत्यधिक प्रदूषित)
वर्ग 2: 20–30 mg/L
वर्ग 3: 10–20 mg/L
वर्ग 4: 6–10 mg/L
वर्ग 5: 3–6 mg/L (कम प्रदूषित)

बीओडी बढ़ने के नुकसान

जलीय जीवों की मौत: ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मरने लगती हैं
दुर्गंध और गंदगी: पानी काला व बदबूदार हो जाता है

पारिस्थितिकी संकट: जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला प्रभावित
बीमारियों का खतरा: हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं
शोधन में कठिनाई: पानी को पीने योग्य बनाना महंगा और मुश्किल होता है

Updated on:
09 Apr 2026 01:54 pm
Published on:
09 Apr 2026 01:52 pm
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