रायपुर

पिता के शरीर में कीड़े देख अस्पताल के बाहर छोड़ भगा बेटा, लावारिस हालत में देख डॉक्टरों में किया इलाज पर…

बेटे ने जब देखा की उसके पिता के शरीर में बीमारी की वजह से कीड़े पड़ गए हैं तो वह उसे लेकर अस्पताल पहुंचा और बाहर ही छोडक़र चला गया।
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Nov 28, 2018
crime news
पिता के शरीर में कीड़े देख अस्पताल के बाहर छोड़ भगा बेटा, लावारिस हालत में देख डॉक्टरों में किया इलाज पर...

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ऐसा मामला सामने आया है जहां एक पिता और बेटे के रिश्ते रिश्ते पर ही सवालिया निशान लगा दे।एक कलयुगी बेटे ने जब देखा की उसके पिता के शरीर में बीमारी की वजह से कीड़े पड़ गए हैं तो वह उसे लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचा और बाहर ही छोडक़र चला गया।

यह मामला रायगढ़ जिले का है। जब अस्पताल के डॉक्टरों ने बुजुर्ग को तड़पता देखा तो उन्होंने उसे भर्ती कर उसका इलाज किया, लेकिन उसे बचा नहीं सके। इसके बाद अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर चौकी की पुलिस ने बुजुर्ग की मौत की खबर उसके बेटों तक पहुंचाई। जब बेटा यहां शव लेने पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया के चलते दो दिन तक पिता का शव नहीं मिला तो वह अस्पताल प्रबंधन और पुलिस वालों की कार्यशैली पर ही सवाल उठाने लगा।

दरअसल प्रेमदास महंत पिता महेश दास 70 साल की उम्र हो जाने से काफी बीमार रहता था। बीमारी से बिस्तर में पड़े-पड़े उसके शरीर में कीड़े पड़ गए थे। इस पर प्रेमदास का बेटों ने उसे इलाज कराने की बात कहकर उसे 23 नवंबर को रायगढ़ मेडिकल कालेज अस्पताल ले गए और पिता को कैजुअल्टी के बाहर छोड़ कर घर चले गए। अस्पताल में लावारिश पड़े वृद्ध की हालत को देखकर डॉक्टरों ने कर्मचारियों ने कहकर उसे भर्ती कराया और इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान वृद्ध ने अपना नाम प्रेमदास महंत निवासी ठाकुरदीया बताया था। उपचार के दौरान २५ नंवबर को उसकी मौत हो गई।

इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने वृद्ध के शव को मरच्यूरी में रखवा दिया और इसकी सूचना पुलिस को दे दी। चौकी पुलिस ने खरसिया पुलिस की मदद से वृद्ध की मौत की सूचना उसके बेटों तक पहुंचाई। इसके बाद 26 तारीख सोमवार को परिजन बुजुर्ग का शव लेने अस्पताल पहुंचे। पता करने पर अस्पताल प्रबंधन ने शव को मरचुरी में रखवाने और उसका मेमो पुलिस देने की बात कहकर उन्हें पुलिस के पास भेज दिया।

जबकि पुलिस का कहना है कि यह नॉर्मल मौत है यदि मर्ग कायम होता तो बॉड़ी उनकी सुपुर्दगी में होती। इस बॉडी को देने न देने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की है। ऐसे में दो दिन तक परिजनों का वहां का चक्कर काटना पड़ा तो वह अपनी गलती छिपाकर उल्टा अस्पताल और पुलिस कर्मियों पर ही आरोप लगाने लगे।

इस संबंध में बुजुर्ग पिता को लवारिश छोडक़र चले जाने की बात पर प्रेमदास के छोटे बेटा फिलेश ने बताया कि जिस समय उसके पिता की तबीयत बिगड़ी वह घर में नहीं था। उसका बड़ा भाई पिता को लेकर अस्पताल पहुंचा, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने से वह पिता को वहीं छोडक़र घर आ गया। उसने यह बात भी किसी को नहीं बताई थी। रविवार को जब खरसिया पुलिस ने घर जाकर पिता की मौत हो जाने की सूचना दी तो इसकी जानकारी मिल पाई।

Published on:
28 Nov 2018 01:52 pm