Stamp paper license ban: रायपुर सहित प्रदेशभर में स्टांप पेपर बेचने के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर पंजीयन विभाग ने अस्थायी रोक लगा दी है।
Stamp paper license ban: छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में स्टांप पेपर बेचने के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर पंजीयन विभाग ने अस्थायी रोक लगा दी है। इस निर्णय के बाद अब नए स्टांप वेंडरों की संख्या में वृद्धि नहीं हो सकेगी। विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर कार्यालयों में चस्पा भी किया गया है।
इस आदेश के बाद नए लाइसेंस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया भी लगभग ठप हो गई है। हालांकि, जानकारी के अनुसार आदेश लागू होने से पहले कई लोगों ने लाइसेंस के लिए आवेदन कर रखा था, जिनकी स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
प्रदेश में ई-स्टांप पेपर की सुविधा लागू होने के बाद पारंपरिक (मैनुअल) स्टांप पेपर का उपयोग लगातार कम होता जा रहा है। विशेष रूप से 500 रुपए से अधिक मूल्य के स्टांप के लिए अब ई-स्टांप ही प्रमुख और पसंदीदा विकल्प बन चुका है, जिससे डिजिटल व्यवस्था की ओर तेजी से बदलाव साफ नजर आ रहा है।
पंजीयन कार्यालयों में अब रजिस्ट्री, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे अधिकांश कार्यों के लिए ई-स्टांप पेपर का उपयोग तेजी से बढ़ गया है। सुविधाजनक और पारदर्शी प्रक्रिया के चलते लोग पारंपरिक स्टांप की बजाय डिजिटल विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं अदालतों में भी 500 रुपए से अधिक मूल्य के मामलों में ई-स्टांप का उपयोग लगभग अनिवार्य हो गया है, जिससे मैनुअल स्टांप पेपर की मांग लगातार घट रही है।
वर्तमान में 10, 20, 50 और 100 रुपए के मैनुअल स्टांप पेपर ही अधिक प्रचलन में हैं। इनका उपयोग किरायानामा, वाहन बिक्री और छोटे अनुबंधों के लिए किया जाता है। बड़े मूल्य के स्टांप पेपर मैनुअल रूप में लगभग समाप्त होते जा रहे हैं। जिले में पहले से ही करीब 100 से अधिक मैनुअल स्टांप वेंडरों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। नए लाइसेंस पर रोक और ई-स्टांप के बढ़ते उपयोग के चलते पारंपरिक वेंडरों के व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है।
ई-स्टांप प्रणाली को बढ़ावा देने के पीछे पारदर्शिता और सुविधा को प्रमुख कारण माना जा रहा है। डिजिटल माध्यम से स्टांप पेपर खरीदने की प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो गई है, जिससे लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। फिलहाल विभाग द्वारा नए लाइसेंस जारी करने पर रोक अस्थायी बताई जा रही है। आने वाले समय में स्थिति की समीक्षा के बाद इस पर निर्णय लिया जा सकता है। तब तक प्रदेश में स्टांप वेंडरों की संख्या यथावत बनी रहेगी।