CG Vidhansabha: आत्मसमर्पित नक्सली सदन की दहलीज पार कर पहुंचे और सदन की कार्यवाही देखी। दूसरी ओर, इस बार के सदन में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष ने भी विभाग की ओर से गलत जानकारी देने का गंभीर आरोप लगाया।
CG Vidhansabha: @राहुल जैन। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र कई मायने में खास रहा है। नवरात्र के पहले दिन सरकार ने जबरिया धर्मांतरण रोकने के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लाया। नकल रोकने और भर्ती परीक्षाओं में तेजी लाने के लिए नए विधेयक सदन में पास हुए। पहली बार 585 आत्मसमर्पित नक्सली सदन की दहलीज पार कर पहुंचे और सदन की कार्यवाही देखी। दूसरी ओर, इस बार के सदन में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष ने भी विभाग की ओर से गलत जानकारी देने का गंभीर आरोप लगाया।
हालांकि ऐसे किसी मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। एनजीटी को एसटीपी की गलत जानकारी देने पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने परीक्षण करने की बात कहीं थी। वहीं, कई मंत्री विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के सवालों से भी घिरते नजर आए।
दरअसल, अक्सर विपक्ष के लोग अधिकारियों द्वारा सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हैं, लेकिन इस बार सत्ता पक्ष के लोगों ने भी इस पर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री लता उसेंडी, राजेश मूणत, अनुज शर्मा, सुशांत शुक्ला, ललित चंद्राकर जैसे अन्य विधायक ने सदन में विभाग की ओर से गलत जानकारी देने पर नाराजगी जताई। साथ ही सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे को विपक्ष ने लपका। विधायक उमेश पटेल ने तो आसंदी से मंत्रियों को प्रताडि़त करने की बात कहीं।
इस बार सदन में कई विधायक प्रश्नकाल के अलावा ध्यानाकर्षण जैसे मुद्दे पर भी गायब रहे। इस दौरान सदन में उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। प्रश्नकाल में भाजपा विधायक रिकेश सेन और सुशांत शुक्ला के प्रश्न के दौरान मौजूद नहीं थे। रिकेश ने अपने प्रश्न के लिए विधायक अनुज शर्मा को अधिकृत किया था, लेकिन इसकी सूचना सदन को लिखित में नहीं दी थी। विधायक इंद्र साव और हीरा मरकाम अपने ध्यानाकर्षण के दौरान मौजूद नहीं थे। विपक्ष की एक विधायक अपने दल के बहिष्कार के कारण ध्यानाकर्षण में शामिल नहीं हो सकी।
विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी तीखे तेवर देखने को मिला। भुगतान को लेकर विधायक लता उसेंडी ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरा। एक बार तो परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने दूसरे प्रश्न का ही जवाब नहीं सके। मंत्री दयाल दास बघेल, लक्ष्मी राजवाड़े, राजेश अग्रवाल, लखनलाल देवांगन, रामविचार नेताम और गजेंद्र यादव भी पक्ष और विपक्ष के सवालों से घिरे। इसके अलावा सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के आरोपों को लेकर भी तीखे तेवर दिखाए। एसआईआर और मनरेगा जैसे मुद्दों पर विधायक अजय चंद्राकर के तीखे तेवर देखने को मिले। इसके अलावा ऐसे कई मौके भी आए, जो विपक्ष ने गड़बडि़यों का आरोप लगाया तो सत्ता पक्ष ने उनके पांच साल के कार्यकाल को याद दिलाकर तीखा पलटवार किया।
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विधानसभा के बजट सत्र में पहली बार के विधायकों ने भी अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही सवाल लगाने के मामले में जागरूक दिखाई और 200 सवालों के क्लब में शामिल हुए। इसमें सुशांत शुक्ला और भावना बोहरा शामिल हैं। अनुभवी विधायकों में 200 सवालों के क्लब में शामिल होने वालों में धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर, पुन्नूलाल मोहले और भोलाराम साहू शामिल हैं।