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छत्तीसगढ़ के जेलों में गूंज रही जय माता दी! 2,397 बंदियों ने रखा व्रत, रमजान में 130 ने रखा रोजा…

Chhattisgarh Jail News: छत्तीसगढ़ की जेलों में इस बार नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है।

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छत्तीसगढ़ के जेलों में गूंज रही जय माता दी! 2,397 बंदियों ने रखा व्रत, रमजान में 130 ने रखा रोजा...(photo-patrika)

छत्तीसगढ़ के जेलों में गूंज रही जय माता दी! 2,397 बंदियों ने रखा व्रत, रमजान में 130 ने रखा रोजा...(photo-patrika)

Chhattisgarh Jail News: छत्तीसगढ़ की जेलों में इस बार नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रदेश की विभिन्न जेलों में बड़ी संख्या में बंदी व्रत-उपवास रखकर भक्ति और साधना में लीन हैं। जेल प्रशासन द्वारा भी इस दौरान विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे बंदी अपनी आस्था का पालन सहज रूप से कर सकें।

Chhattisgarh Jail News: 2,397 बंदी कर रहे नवरात्र व्रत

प्रदेशभर की जेलों में कुल 2,397 बंदी नवरात्र का उपवास कर रहे हैं। इनमें 2,125 पुरुष और 272 महिला बंदी शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी आस्था और अध्यात्म की भावना जीवित रहती है और व्यक्ति को सकारात्मक दिशा देने का काम करती है।

जेल प्रशासन ने की विशेष व्यवस्थाएं

महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में व्रत रखने वाले बंदियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। उन्हें फल, दूध और अन्य उपवास योग्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

अंबिकापुर जेल में कलश स्थापना, भजन-कीर्तन

केंद्रीय जेल अंबिकापुर में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के नेतृत्व में बंदियों ने विधिवत कलश स्थापना की है। यहां प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पूरे परिसर में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिल रहा है, जो बंदियों के मानसिक और भावनात्मक सुधार में सहायक बन रहा है।

आध्यात्मिकता से सुधार की ओर बढ़ते कदम

जेल अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन बंदियों के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे उनमें अनुशासन, आत्मचिंतन और सुधार की भावना विकसित होती है, जो उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करती है।

रमजान में भी दिखी आस्था की मिसाल

नवरात्र के साथ-साथ रमजान के पवित्र महीने में भी जेलों में आस्था का ऐसा ही माहौल देखने को मिला। करीब 130 बंदियों ने रोजा रखा, जिनके लिए इफ्तार और सेहरी के समय विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। इससे यह संदेश जाता है कि जेलों में सभी धर्मों का सम्मान और पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

धार्मिक सौहार्द का उदाहरण बनी जेलें

छत्तीसगढ़ की जेलें इस समय धार्मिक सौहार्द और सह-अस्तित्व की मिसाल पेश कर रही हैं, जहां अलग-अलग धर्मों के बंदी अपने-अपने पर्वों को श्रद्धा और शांति के साथ मना रहे हैं। यह न केवल सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है।