छत्तीसगढ़ में तितलियों की 22 और प्रजातियों का इजाफा हुआ है।अब छत्तीसगढ़ में तितलियों की कुल 159 प्रजातियां हो गई हैं।
रायपुर. पहले तितलियां आमतौर पर बागों में देखने को मिल जाती थी पर अब यह धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। तितलियों की प्रजातियों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रकृति विज्ञानी की विशेष पहल पर प्लानिंग शुरू की गई है। इसी का नजीता है कि छत्तीसगढ़ में तितलियों की 22 और प्रजातियों का इजाफा हुआ है।
अब छत्तीसगढ़ में तितलियों की कुल 159 प्रजातियां हो गई हैं। खास बात यह है कि पिछले वर्ष केवल जशपुरनगर में ही तितलियों की 82 प्रजातियों को चिह्नित की गई थीं। छत्तीसगढ़ के युवा प्रकृति विज्ञानी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट के अध्येता अनुपम सिंह सिसौदिया ने छह साल के सर्वेक्षण और शोध अध्ययन के बाद तैयार की है। एक राष्ट्रीय कार्यशाला में कल यहां वन विज्ञानी और अधिकारियों की उपस्थिति में प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी द्वारा किया गया।
जशपुर में पहली बार इन नई तितलियों को किया गया चिह्नित
इस सर्वेक्षण में कामन ओनिक्स, इंडिगो फ्लैश तथा स्माल क्यूपिड, तितलियों की यह तीन ऐसी प्रजाति पाई गई, जिससे इनके वितरण क्षेत्र में जशपुर का नाम पहली बार जुड़ रहा है। ये प्रजातियां अब तक पश्चिमी घाट, हिमालय तराई क्षेत्र और अंडमान निकोबार जैसे इलाकों से ही ज्ञात थीं। इसी तरह केवल जशपुरनगर में अब तक एंगल्ड सनबीम, प्लम जूड़ी, फलफी टीट, पिकोक रॉयल, गोडी बेरॉन, पेंटेट लेडी, रेड स्पॉट, हेज ब्लू, इंडियन ओकब्लू की प्रजातियां मिली है।