रायपुर

Chhattisgarh News: 61 हजार करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा, 22 हजार शेल कंपनियां बेनकाब, देखें कैसे चलता था खेल

Shell Companies Tax Fraud: कागजों पर चलने वाली शेल कंपनियों के जरिए देशभर में टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा खेल सामने आया है। 22 हजार से अधिक शेल कंपनियां बेनकाब हो चुकी हैं, जिनसे जुड़े मामलों में 61 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी उजागर हुई है।

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Jun 07, 2026
Chhattisgarh News
प्रतीकात्मक चित्र

रायपुर@सुबोध कुमार झा। Chhattisgarh News: प्रदेश सहित पूरे देश में टैक्स चोरी का एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय है, जो वास्तविक कारोबार के बिना ही सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा रहा है। इसे 'शेल कंपनियों' का जाल कहा जाता है। बिना किसी जमीन-हकीकत वाले इन कारोबारों के जरिए फर्जी बिलिंग और कागजी लेनदेन कर भारी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया जा रहा है। पिछले 6 वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो देश भर में 22000 से अधिक ऐसी शेल कंपनियां पकड़ी जा चुकी हैं, जो लोहा, स्क्रैप, कोयला और शराब जैसे क्षेत्रों में सक्रिय थीं।

केवल वर्ष 2024-25 के दौरान देशभर में 25009 फर्जी कंपनियों का भंडाफोड़ हुआ, जिनसे जुड़े आरोपियों द्वारा 61545 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई। अकेले छत्तीसगढ़ में 170 से अधिक ऐसी कंपनियां उजागर हुईं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपए का टैक्स गबन किया था। वर्ष 2026 में भी आयकर विभाग, सेंट्रल और स्टेट जीएसटी तथा जीएसटी इंटेलिजेंस विभाग लगातार सक्रिय हैं और अब तक 25 से अधिक बड़ी कार्रवाइयां कर चुके हैं।

साक्ष्य और कारनामे

सीजीएमएससी घोटाला: ईओडब्ल्यू और ईडी की छापेमारी में शशांक चोपड़ा और उनके सहयोगियों के ठिकानों से 85 फर्जी फर्में मिलीं। इनके माध्यम से 28.46 करोड़ रुपए का आईटीसी घोटाला किया गया था। 2800 करोड़ का शराब घोटाला: राज्य में शराब घोटाले को अंजाम देने के लिए 200 से अधिक बैंक खातों का उपयोग कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। फर्जी होलोग्राम और लेबलिंग का सहारा लेकर सिंडिकेट के जरिए काली कमाई को सफेद किया गया। इस प्रकरण में 85 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

महादेव सट्टा एप: भिलाई से शुरू हुआ 20,000 करोड़ रुपए का यह साम्राज्य शेल कंपनियों की नींव पर ही खड़ा था। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने एजेंटों और बेनामी बैंक खातों के जरिए हवाला रैकेट चलाया। बिना किसी वास्तविक कारोबार के करोड़ों का ट्रांजेक्शन किया गया, जिसका भंडाफोड़ भिलाई पुलिस, ईओडब्ल्यू और ईडी द्वारा किया गया।

क्या होती हैं शेल कंपनियां?

शेल कंपनी एक ऐसी कानूनी रूप से पंजीकृत इकाई होती है, जिसका वास्तविक दुनिया में न तो कोई कार्यालय होता है और न ही कर्मचारी। इसका अस्तित्व केवल कागजों में होता है। इसे अक्सर किसी 'डमी' व्यक्ति के नाम पर खोला जाता है ताकि मुख्य सरगना की पहचान छिपी रहे।

शेल कंपनियों का उद्देश्य और कार्यप्रणाली ऐसी

इन कंपनियों का एकमात्र मकसद टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग है। इनकी कार्यप्रणाली में बिना माल की आवाजाही के सिर्फ बिल बनाकर आईटीसी क्लेम लेना। गैर-कानूनी धन को इन कंपनियों के खातों में घुमाकर उसे वैध व्यापारिक आय के रूप में दिखाना। बड़ी कंपनियां भी कई बार विलय या नए प्रोजेक्ट की आड़ में इनका इस्तेमाल अपनी संपत्तियों और देनदारियों को छिपाने के लिए करती हैं।

Published on:
07 Jun 2026 08:22 am