
इट्सा हॉस्पिटल्स में दुर्लभ कंजेनिटल डायफ्रामैटिक हर्निया की सफल सर्जरी (photo PAtrika)
Raipur Health News: ताबीर हुसैन। मामूली चोट लगने के बाद दो वर्षीय बच्चे को अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ हुई। शुरुआती जांच में इसे टेंशन न्यूमोथोरैक्स माना गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे इट्सा हॉस्पिटल्स रेफर किया गया। यहां विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच में पाया कि बच्चे को जन्मजात दुर्लभ बीमारी कंजेनिटल डायफ्रामैटिक हर्निया (सीडीएच) है, जो दो वर्ष तक छिपी रही थी। इस बीमारी में डायफ्राम में छेद होने से पेट के अंग छाती में पहुंच जाते हैं और फेफड़ों पर दबाव पड़ता है।
डॉ. सचिन पिटलवार, डॉ. स्वास्ति केशरी और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. देवव्रत दुबे की टीम ने सही समय पर बीमारी की पहचान की। इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. तन्मय मोतीवाला ने सफल ऑपरेशन कर पेट, आंत और प्लीहा को वापस सही स्थान पर स्थापित किया तथा डायफ्राम की मरम्मत की। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. एम.डी. असरार सिद्दीकी ने संभाली।
सर्जरी के बाद बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू में निगरानी में रखा गया और कुछ दिनों बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, उल्टी, पेट फूलना या चोट के बाद अचानक तबीयत बिगडऩे जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
दो वर्षीय बच्चे को मामूली चोट लगने के बाद अचानक सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने इसे टेंशन न्यूमोथोरैक्स माना, लेकिन उपचार के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए इट्सा हॉस्पिटल्स, रायपुर रेफर किया गया।
इट्सा हॉस्पिटल्स में विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच की तो पता चला कि बच्चे को कंजेनिटल डायफ्रामैटिक हर्निया (Congenital Diaphragmatic Hernia-CDH) नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। इस बीमारी में डायफ्राम (छाती और पेट को अलग करने वाली मांसपेशी) में जन्म से छेद होता है, जिसके कारण पेट के अंग जैसे आंत और प्लीहा छाती में पहुंच जाते हैं। इससे फेफड़ों पर दबाव पड़ता है और सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है।
Updated on:
23 Jul 2026 04:19 pm
Published on:
23 Jul 2026 04:14 pm
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