RTE News: छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत इस साल 21,983 बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा, लेकिन बड़ी चिंता यह है कि इनमें से अधिकांश छात्र 12वीं तक अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते।
RTE News: छत्तीसगढ़ के रायपुर में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में प्रवेश की प्रक्रिया अभी पूरे प्रदेश में चल रही है। इस साल पहली कक्षा में 21 हजार 983 छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। लेकिन इस संख्या में एक बड़ा सवाल ये है कि क्या ये सारे बच्चे पूरी 12वीं तक पढ़ाई कर पाएंगे।
ये सवाल इसलिए भी क्योंकि आरटीई छत्तीसगढ़ के वेबसाइट के अनुसार, राज्य में 10 से 15 फीसदी ही आरटीई में प्रवेश लेने के बाद 12वीं तक पढ़ाई कर पाते हैं। लगभग 85 फीसदी बच्चे इससे बाहर हो जाते हैं। डाटा के अनुसार, 2023-24 में पहली कक्षा में प्रवेश लिए कुुल स्टूडेंट््स में से कुल का लगभग 10 फीसदी और 2024-25 में पहली कक्षा में प्रवेश लिए कुल का लगभग 17 फीसदी बच्चे पहली कक्षा से आगे बढक़र 12वीं तक पढ़ाई कर पाए।
जानकारों के अनुसार, आरटीई के तहत पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं अपना स्कूल भी बदल सकते है। स्टूडेंट््स को आठवीं के बाद 9वीं में प्रवेश के लिए निरंतरता का ऑप्शन दिया गया है। लेकिन ये भी पहुंच सीमा के बीच होता है। इसमें नोडल प्राचार्य सर्वे करता है फिर प्रवेश दिलवाता है। उसमें भी यदि सीट खाली है और पहुंच सीमा के भीतर है तभी प्रवेश दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, इस क्राइटेरिया से कोई भी छात्र अपना स्कूल बदलने में भी असमर्थ होते है।
प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा की आरटीई में प्रवेश लेने वाले बच्चे गरीब परिवार से होते है। जो बीच में ही कई कारणों से स्कूल छोड़ देते है। इसके साथ ही बच्चों में सबसे ज्यादा पढ़ाई का लोड 9वीं और 10वीं में आता है। यदि कोई बच्चा 9वीं कक्षा में फेल हो जाता है तो उन्हें आरटीई में प्रवेश नहीं दिया जाता।
इसके लिए हमने सुझाव दिया था कि ऐसे बच्चों को छात्रवृत्ति की तरह सहयोग किया जाए। पैसे नहीं मिलने के कारण बच्चे बाहर हो जाते है। वही कई स्कूल में 8वीं तक ही तक ही पढ़ाई होती है। उसके बाद वहां के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढऩा पड़ता है। जिसके कारण भी बच्चों की संख्या में कमी आती है।