भोरमदेव शक्कर कारखाना में पिछले वर्ष पहली बार बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के पद पर निर्वाचन किया गया।
राम्हेपुर स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में पहली बार पिछले वर्ष 24 जून को चुनाव कर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य चुने गए। इनके द्वारा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाए गए। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के चार सदस्य सरकारी विभाग से, तीन शेयर धारक संस्थानों से और 12 व्यक्तिगत शेयरधारक से चुनाव के माध्यम से पहुंचे। लेकिन इसमें पांच सदस्य आयोग्य की कगार पर है। क्योंकि नवंबर 2017 में पंडरिया स्थित सरदार वल्लव भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना में पेराई सीजन प्रारंभ होते ही भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के कार्य क्षेत्र का विभाजन हो गया। जिसके चलते संचालक सदस्यों का कार्यक्षेत्र भी भोरमदेव शक्कर कारखाना से पंडरिया के शक्कर कारखाना में चला गया।
दोनों कारखाना द्वारा कार्यक्षेत्र विभाजन किया गया। इस दौरा भोरमदेव कारखाना से शेयरधारकों की सूची व अंश सूची के साथ एक करोड़ 3 लाख 88 हजार रुपए का चेक वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाना के नाम पे्रषित किया गया। वहीं वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाना की ओर से शेयरधारकों की सूची व अंश सूची के साथ एक करोड़ 80 लाख 20 हजार रुपए का चेक भोरमदेव कारखाना के नाम प्रेषित किया गया।
शिकायत में बताया गया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य सुषमा चंद्रवंशी, किशोर चंद्राकर, उत्तरा कुमार, सुरेश दुबे और राजकुमार कश्यप का कारखाना के कार्यक्षेत्र का विभाजन पश्चात 3 नवंबर 2017 से शेयरधारक सदस्यता खो चुके हैं। इसी कारण यह संचालक सदस्य के पद धारण करने अयोग्य हो गए हैं। मामले में पांचों सदस्यों को संयुक्त पंजीयक कार्यालय दुर्ग की ओर से नोटिस भी मिल चुका है। मामले को लेकर काफी राजनीति हो रही है, जिसके चलते ही मामला दबाकर रखा गया।
इस मामले में तो नवंबर 2017 में ही कार्रवाई हो जाती, यदि संयुक्त पंजीयक के सक्षम अधिकारी या उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं नियम के अनुरूप इसमें संज्ञान लेते। लेेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके चलते ही नवागढ़ के शेयरधारक समिति के सदस्य जितेन्द्र सिंह भुवाल ने इसकी शिकायत की।
रायपुर तक शिकायत होने के बाद मामले को लेकर जांच टीम बनाई गई। तीन सदस्यी टीम में सहायक पंजीयक पीआर देशमुख, वरिष्ट सहकारी निरीक्षक वाईके मिश्र और डोमन सिंग ठाकुर हैं, जो जांच कर अपना रिपोर्ट सब्मिट करेंगे। मामले की जांच लगभग पूर्णता की ओर है।
जांच कर रहे अधिकारियों ने कहा कि संचालक मंडल के पांच सदस्यों के अयोग्य होने के सम्बन्ध में जांच की जा रही है। हमनें जरुरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिया है। जल्द जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे।