रायपुर

CG conversion: जबरन धर्मांतरण कराने पर 20 साल तक की सजा, 25 लाख तक लगेगा जुर्माना

CG conversion: जबरिया धर्मांतरण कराने पर आजीवन कारावास की सजा होगी। हालांकि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका का हवाला देकर इसका विरोध किया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

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Mar 20, 2026
जबरन धर्मांतरण कराने पर 20 साल तक की सजा (Photo AI)

CG conversion: @ राहुल जैन। विधानसभा के बजट में गुरुवार को दिन ऐतिहासिक रहा। प्रदेश 58 साल बाद जबरिया धर्मांतरण को रोकने के लिए विपक्ष की गैर मौजूदगी में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधयेक 2026 ध्वनिमत से पारित हुआ। डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसे सदन में पेश किया था। प्रदेश में इससे पहले वर्ष 1968 का कानून लागू था।

नए विधेयक में 20 साल तक की सजा और 25 लाख रुपए तक के जुर्माना का प्रावधान है। दोबारा जबरिया धर्मांतरण कराने पर आजीवन कारावास की सजा होगी। हालांकि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका का हवाला देकर इसका विरोध किया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। इस पर डिप्टी सीएम ने कहा, कोई भी गंभीर चर्चा होती है तो विपक्ष के लोग बहिर्गमन या बहिष्कार कर के जाते हैं। इसे पलायन कहा जाना चाहिए।

विपक्ष के विरोध की यह वजह

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, 11 राज्यों के ऐसे ही मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित। ऐसे में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपना चाहिए।

सत्ता पक्ष का यह तर्क

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट से कहीं कोई स्टे नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ये नहीं कहा, इस पर नये कानून न बनाए जाए। राज्य सरकार चाहे तो कानून बना सकती है।

ऐसे लागू होगा विधेयक

अब नए विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद इसका राजपत्र में प्रकाशन होगा और इसके साथ ही प्रदेशभर में नया विधेयक लागू हो जाएगा।

इसे माना जाएगा धर्मांतरण

  • किसी व्यक्ति द्वारा अपने आस्था या धर्म का त्याग करना और दूसरा धर्म अपनाना।
  • जन्म, विवाह और मृत्यु से संबंधित अनुष्ठानों सहित स्थानीय पारंपरिक प्रथाओं का पालन करना बंद कर देना और उसके स्थान पर किसी अन्य धर्म के अनुष्ठानों, को अपनाना।
  • पारंपरिक या पैतृक देवताओं की पूजा का त्याग करना या बंद करना, जिसमें उनकी पूजा से संबंधित प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों, त्योहारों या अन्य प्रथागत प्रथाओं को बंद करना और स्वयं की मूल धार्मिक परंपरा से अलग विश्वासों या आस्थाओं को अपनाना और उनका पालन करना।
  • किसी भिन्न मूल के धर्म को स्वीकार करना, जो अपने धर्मशास्त्र के भाग के रूप में धर्मांतरण या अन्यथा की सुविधा प्रदान करता है।
  • अपने पारंपरिक मान्यताओं का पालन करना बंद करते हुए किसी पराये विश्वास या धर्म का पालन करना और साथ ही गैर-धर्मांतरित रहने का दावा करना।
  • स्पष्टीकरणः यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में पुनः वापस आता है, तो ऐसी वापसी इस अधिनियम के अंतर्गत धर्मांतरण के रूप में नहीं मानी जाएगी।

6 अध्यायों में 31 बिंदु शामिल

इस विधेयक में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में वैध-अवैध धर्मांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। सामूहिक धर्मांतरण करने पर सजा के साथ 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा सजा और जुर्माना भी है।

Updated on:
20 Mar 2026 05:42 pm
Published on:
20 Mar 2026 05:40 pm
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