Bottled Water Demand in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच रायपुर में बोतलबंद पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ब्रांडेड और नॉन-ब्रांडेड जार, बोतल और पाउच की बिक्री में भारी उछाल देखा जा रहा है।
Bottled Water Demand: छत्तीसगढ़ के भीषण गर्मी के बीच रायपुर में बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। शहर में ब्रांडेड और नॉन-ब्रांडेड जार, पानी की बोतलों और पाउच की मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है। एनआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि गर्मियों में बोतलबंद पानी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पैकेज्ड और आरओ पानी में टीडीएस और जरूरी मिनरल्स की मात्रा काफी कम हो जाती है, जबकि पानी की गुणवत्ता का आकलन केवल टीडीएस से नहीं किया जा सकता।
डॉ. कुमार के अनुसार लोगों का झुकाव तेजी से आरओ और बोतलबंद पानी की ओर बढ़ा है, जबकि नगर निगम का पानी भी गुणवत्तापूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि 20 रुपए में बिकने वाली पानी की बोतल पर वास्तविक पानी की लागत महज 2-3 रुपए होती है, जबकि बाकी रकम प्लास्टिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के नाम पर वसूली जाती है।
जिले में छोटे-बड़े लगभग 25-30 पैकेज्ड डेस्ट्रोएड वाटर प्लास्टिक सक्रिय हैं। ज्यादातर प्लास्टिक भूजल पर निर्भर हैं। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की एनओसी और रिचार्ज व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन कई छोटी यूनिट््स में इसका पालन संदिग्ध है। नगर निगम के पानी को बेहतर बनाने की बजाय बोतलबंद पानी पर निर्भरता बढ़ रही है जो प्लास्टिक कचरा भी बढ़ा रही है। डॉ. चंदन की मानें तो एक बोतल (एक लीटर) पानी तैयार करने में करीब 1.4 लीटर से लेकर 17 लीटर तक पानी खर्च हो जाता है। यह मात्रा पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि प्लांट का आकार कितना बड़ा है और उसमें किस प्रकार की टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है।
प्रो. चंदन ने बताया, आरओ पानी में जरूरी मिनरल्स (कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि) लगभग खत्म हो जाते हैं। लंबे समय तक ऐसे पानी के सेवन से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। कई अध्ययनों में भी राजधानी के आरओ पानी में कम टीडीएस पाया गया है। उन्होंने सलाह दी कि नगर निगम के पानी को विश्वसनीय बनाने पर फोकस किया जाए।
बाजार में नॉन-ब्रांडेड जार और पाउच की बिक्री ब्रांडेड से ज्यादा है, क्योंकि ये सस्ते पड़ते हैं। गर्मी में होटल, ऑफिस, स्कूल और घरों में डिमांड चरम पर है। हालांकि कई उपभोक्ता शिकायत करते हैं कि कुछ बोतलों में स्वाद या गुणवत्ता ठीक नहीं होती। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की भूमिका भी यहां अहम है। एफएसएसआई नियमों के तहत पैकेज्ड पानी हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है।