
रायपुर . राजधानी की लाइफलाइन यानी जीई रोड के सबसे संकरे, लेकिन व्यस्ततम हिस्से यानी शारदा चौक से तात्यापारा के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की टीम जल्द ही सीमांकन शुरू करेगी। चौड़ीकरण की चपेट में आने वाली निजी और शासकीय भूमि की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रिपोर्ट मिलने के बाद भू-अर्जन और भूदान की प्रक्रिया की जाएगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन की साझा टीम बनाई गई है। इसमें तहसीलदार, आरआई, पटवारी समेत पीडब्लूडी के अधिकारी हैं। सड़क को दोनों ओर 20-20 फीट तक चौड़ा किया जाएगा। शारदा चौक से तात्यापारा चौक तक की सड़क की मौजूदा चौड़ाई 30 से 45 फीट तक है। इसे एक समान 80 फीट चौड़ी करना है। इसके लिए निगम को सड़क के दोनों हिस्सों में 20-20 फीट जमीन लेनी होगी। सर्वे में यह भी तय होगा कि कहां, किससे, कितनी जमीन लेनी है।
12 साल से अटका था प्रोजेक्ट
जीई रोड की शारदा चौक से आमापारा तक चौड़ाई बढ़ाने का प्रोजेक्ट 2006-07 में शुरू किया गया था। लेकिन आमापारा चौक से तात्यापारा तक 25 करोड़ रुपए मुआवजा बांटकर सड़क चौड़ीकरण करने के बाद से यह प्रोजेक्ट अटका था। अब तकरीबन 12 साल बाद बचे हुए हिस्से को फिर से चौड़ा करने की कवायद शुरू हुई है।
मुआवजा विवाद फंसा था चौड़ीकारण
सड़क चौड़ीकरण मुआवजा बांटने के बाद ही संभव हो सकेगा। इसे लेकर शासन और नगर निगम के बीच विवाद चल रहा था कि मुआवजा कौन देगा? इसके बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने शासन की ओर से प्रोजेक्ट को २८.५ करोड़ रुपए देने की सहमति दी थी। इसके बाद से ही यह प्रोजेक्ट अब आगे बढ रहा है।
तय हो चुकी हैं दरें
करीब आधा किमी के इस हिस्से की चौड़ाई बढ़ाने में 75 मकान-दुकान प्रभावित होंगे। नगर निगम की ओर से करीब डेढ़ साल पहले हुए सर्वे के बाद तय किया गया था कि प्रभावितों को 8९00 रुपए प्रति वर्गफीट तथा यहां से तात्यापारा चौक तक 6950 रुपए वर्गफीट की दर से मुआवजा देना पड़ सकता है।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात
जीई रोड के इस हिस्से में सबसे ज्यादा दिक्कत शारदा चौक से फूल चौक तक करीब सौ मीटर हिस्से में है, जो बेहद संकरा है। इससे रोजाना शहर के 5 लाख से ज्यादा लोगों को राहत मिलेगी, जो जाम में बुरी तरह फंसते हैं। इस सड़क का चौड़ीकरण दो चरणों में करने की तैयारी में है। पहले चरण में शारदा चौक से पटाखा दुकान तक के हिस्से को लिया जा सकता है। यहां सड़क महज 30-35 फीट चौड़ी है, जिसे 80 फीट किया जाना है।
इसके लिए जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम सर्वे कर तय करेगी कि कहां, किससे, कितनी जमीन लेनी है? इसके बाद भूअर्जन की प्रक्रिया की जाएगी।
हरिवंश मिरी, एसडीएम, रायपुर