बदलाव-सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका पर दिया आदेश
रायसेन। दीपों के महापर्व दीपावली पर इस बार रंगत बिना आतिशबाजी के बिना अधूरी ही रह जाएगी। क्योंकि यह बात सभी अच्छी तरह जानते हैं। दीपावली के दौरान बम पटाखों के जरिए होने वाले प्रदूषण से वास्तव में प्रकृति को जो भारी नुकसान हो रहा है उसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली ने हाल ही में किसी व्यक्ति ने एक जनहित में याचिका लगाई थी।
इस अर्जी की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश में 7 नवंबर बुधवार को मनाई जाने वाली दिवाली पर्व पर धन कीदेवी लक्ष्मी कुबरे गणपति की पूजन आरती के बाद सिर्फ रात 8 से 10 बजे तक दो घंटे ही आतिशबाजी की जा सकेगी ।
जबकि धनतेरस के दिन से ही रोजाना लाखों रूपए की आतिशबाजी फोड़ दी जाती थी ।बहरहाल अब देखना यह है कि जिला व पुलिस प्रशासन समेत सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन आमजन कर पाते हैं अथवा नहीं। दीपावली की रात करीब 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे फोडऩे का समय दिया है।
समय की यह पाबंदी सुप्रीम कोर्ट ने एक पखवाड़े पहले ही तय कर दी है।दीपावली के पर्व के अलावा बाकी सभी त्यौहारों, शादी विवाह सगाई ,31 दिसंबर, बर्थ-डे पार्टी के आयोजनों में भी पूरे देशभर में नियम लागू होंगे। यानि पटाखों पर फिजूलखर्ची करने वालों की अब बिल्कुल खैर नहीं होगी ।
पुलिस पर सौंपी जिम्मेदारी,थानेदार होंगे जिम्मेदार
एसपी जेएस राजपूत ने बताया कि दरअसल सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली ने अपने आदेश में यह साफ कहा है कि ज्यादा आवाज के बम पटाखों और अधिक प्रदूषण फैलाने वाली आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जो भी व्यक्ति अगर रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी का प्रदर्शन करते हुए मिले तो उनके खिलाफ संबंधित थाने के थानेदार काननूी कार्रवाई भी सुनिश्चित क र सकते हैं । उन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना के तहत केस दर्ज किया जाएगा।पुलिस को आतिशबाजी का समय व स्थान निश्चित करना होगा । इसके लिए स्कूल कॉलेजों,
आईटीआई में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
ऑनलाइन बिक्री पर लगाया प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में न बल्कि जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दीपावली की आतिशबाजी के लिए समय निर्धारित किया गया है। बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने बम पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
किसी भी तरह से आतिशबाजी और पटाखों की मनमानी करतेहएु बिक्री करते हएु कोई व्यापरी पाया गया तो उसके खिलाफ वैधानिक कानूनी कार्रवाई की जाएगी । आतिशबाजी विक्रेताओं को सुी्रम कोर्ट ने गाइड लाइन भी तय कर हिदायत दी है। अगर आदेश का पालन कड़ाई से नहीं किया तो लापरवाहों को जेल भी हो सकती है।
बच्चों को पटाखों से ये नुकसान....
* उन्हें गंभीर अस्थमा का अटैक आ सकता है।
* निमोनिया के मामले बच्चों में बढ़ सकते हैं।
* दिमाग का विकास प्रभावित हो सकता है।
* फेफड़ों से संबंधी सभी बीमारियों का बढ़ सक ता है खतरा।
* प्रदूषित वातावरण से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है।