कलेक्टर अरविंद दुबे ने शनिवार रात ही आबकारी विभाग के सेहतगंज में पदस्थ चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। रविवार को श्रम निरीक्षक राम कुमार श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया।
रायसेन. जिले के सेहतगंज स्थित सोम डिस्टलरी में शनिवार को बाल कल्याण के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने छापामार कर 59 बच्चों को रेस्क्यू किया था। इस मामले में मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद खासी हलचल बढ़ी और शाम तक मामले को दबाने और किसी तरह रफा दफा करने के आबकारी विभाग के प्रयास असफल हो गए। कलेक्टर अरविंद दुबे ने शनिवार रात ही आबकारी विभाग के सेहतगंज में पदस्थ चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। जबकि रविवार को श्रम निरीक्षक राम कुमार श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया। वहीं पुलिस ने सोम डिस्टलरी के संचालक के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। हालांकि संचालक का नाम सामने नहीं आ पाया है।
रविवार को सुबह से शाम तक सेहतगंज में खासी हलचल रही। कलेक्टर, एसपी विकाशशाहवाल सहित श्रम, आबकारी, महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। जो शनिवार को रेस्क्यू किए गए 39 बालकों के दस्तावेजों की जांच पड़ताल के साथ उनके बयान दर्ज करते रहे। वहीं रेस्क्यू की गई 20 लड़कियों में से नाबालिग पाई गई 11 लड़कियों को उनके परिजनों को सौंपने की कार्रवाई जारी रही। बयानों के साथ उक्त बच्चों के पालकों के भी बयान लिए गए।
लापरवाही हुई उजागर
सोम डिस्टलरी में आबकारी विभाग का पूरा कार्यालय है, जिसमें डीओ के अलावा तीन अन्य कर्मचारी पदस्थ हैं। इसके अलावा श्रम विभाग के एक निरीक्षक की भी यहां ड्यूटी है, ताकि ये सभी फैक्ट्री में बाल श्रम सहित अन्य नियम विरुद्ध होने वाले कार्यों पर नजर रखें। लेकिन इन जिम्मेदारों ने फैक्ट्री संचालक से संबंध निभाए और लंबे समय से कई बच्चे फैक्ट्री में मजदूरी करते रहे। जिनके हाथ केमिकल से गल गए हैं।
देर रात तक चल हंगामा
शनिवार देर रात तक सेहतगंज थाने में हंगामा चलता रहा। जिन लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था। उनके पालक एकत्र होकर अपनी बेटियों को घर ले जाने की मांग कर रहे थे। दूसरी ओर बाल कलयाण समिति लड़कियों को बाल सुधार ग्रह भेजना चाहती थी, लेकिन इसके लिए जरूरी कोरम नहीं था। समिति के अध्यक्ष अतुल दुबे के अलावा एक सदस्य ही मौजूद थे, जबकि पांच सदस्यों का होना जरूरी था। हालांकि देर रात किसी तरह मामला बना और बच्चियों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
प्रभारी का बयान रहा चर्चा में
फैक्ट्री स्थित कार्यालय में पदस्थ प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी कन्हैया अतुलकर ने शनिवार रात कलेक्टर को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा थ। जिसमें उन्होंने लिखा है कि फैक्ट्री में बच्चे अपने माता पिता को टिफन देने आए थे। जबकि रेस्क्यू की कार्रवाई के दौरान बच्चे फैक्ट्री में काम करते पाए गए थे। अतुलकर का उक्त पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और हंसी का कारण बना। उनका यह प्रयास उन्हे निलंबन से नहीं बचा सका।
कई स्तर पर लापरवाही
बताया जाता है कि सोम डिस्टलरी में बच्चों को एक स्कूल बस से लाया जाता था। ताकि कोई शक न हो। बस सीधे फैक्ट्री के अंदर जाकर बच्चों को उतारती थी। इस मामले में परिवहन विभाग की लापरवाही भी सामने आती है। आए दिन सडक़ों पर बसों की जांच करने वाले आरटीओ को कभी यह बस दिखाई नहीं दी। फैक्ट्री संचालक का दबदबा इतना है कि आबकारी का पूरा अमला मौजूद रहने के बाद भी यहां बच्चों से काम कराया जाता रहा। कई बार जिला आबकारी अधिकारी भी फैक्ट्री गई हैं, उन्हें भी ये बच्चे वहां काम करते नजर नहीं आए। क्षेत्र के लिए पदस्थ श्रम निरीक्षक ने एक बार भी फैक्ट्री में श्रम कानूनों के पालन की स्थिति पर गौर नहीं किया। किया भी तो पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। यही कारण उनके निलंबन का आधार बना।
निलंबित किया
शनिवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने सोम फैक्ट्री से 59 बच्चों का रेस्क्यू किया था। इस मामले में आबकारी विभाग के चार और एक श्रम विभाग के कर्मचारी को निलंबित किया गया है। बच्चों के बयान बाल कल्याण समिति के समक्ष लिए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद दुबे, कलेक्टर रायसेन।
कार्रवाई जारी है
सोम फैक्ट्री के संचालक के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच के बाद संचालक का नाम पता कर जोड़ा जाएगा। आगे की कार्रवाई जारी है।
विकाश शाहवाल, एसपी रायसेन।