कडिय़ाहाट गांव का मामला
ब्यावरा. एक ओर प्रसूता की डिलिवरी स्कूल वालों ने आसानी से करवा दी वहीं दूसरे मामले में जननी एक्सप्रेस चालक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मलावर से लगे कडिय़ाहाट में प्रसूता को दर्द से कराहती ही चालक छोड़ आया। परिजन मजबूरन ऑटो से प्रसूता को ले गए,लेकिन बीच जंगल में ही डिलिवरी हो गई।
मुकेश प्रजापति निवासी पाड़ली महाराज ने पत्नी बरखा (27) की डिलिवरी के लिए सुठालिया के जननी वाहन को कॉल किया। वाहन आ भी गया,लेकिन प्रसूता को लेकर नहीं गया। उससे कहा गया कि प्रसूता को दर्द बढ़ गया है तो आप सुठालिया के बजाए मलावर या आमल्या ले चलो, लेकिन चालक बहस करता रहा और बोला कि गाड़ी सिर्फ सुठालिया ही जाएगी और कहीं नहीं?
थोड़ी बाद खाली गाड़ी लेकर ही वह सुठालिया लौट गया। इसके बाद परिजन प्रसूता को ऑटो के माध्यम से मलावर ले जाने लगे, लेकिन सुंदरपुरा और आगर के बीच के जंगल में ही डिलिवरी हो गई। जहां महिला ने एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। बाद में उसे मलावर में भर्ती किया गया।
वैसे इन लोगों का दायरा रहता है, फिर भी केस की गंभीरता के हिसाब से नजदीकी स्वस्थ केंद्र ले जाने का प्रावधान है। में जननी एक्सोर्स के सम्बंधित प्रभारी से बात करता हूं।
-शैलेन्द्र सिंह, डीपीएम, राजगढ़
जननी वाहन हमारे अंतर्गत नहीं आते उनका अलग मामला है। एक सीमित क्षेत्रउन्हें दे रखा यदि किसी को कहीं जाना है तो वह अपने निजी वाहन से जाए।
-एच. सी. अहीरवार, सीबीएमओ, सुठालिया
एक स्कूल प्रबंधन ने करवाई, दूसरी एंबुलेंस में हुई डिलिवरी
लोधीपुरा गांव से बाइक पर पति और ननंद के साथ अस्पताल जा रही एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो सुठालिया रोड स्थित न्यू प्रज्ञा स्कूल में उसे ले जाया गया। जहां स्टॉफ ने न सिर्फ उसकी विधिवत डिलिवरी करवाई बल्कि संजीवनी-108 बुलाकर उसे अस्पताल भी पहुंचवाया।
लोधीपुरा गांव की करिश्मा पति सोनू लववंशी (23) को प्रसव पीड़ा हुई तो पति और उसकी ननंद बाइक पर ही उसे अस्पताल ले जाने निकल गए। कोलू-भेरू मंदिर के पास उसे दर्द बढ़ा तो बगल के ही एक स्कूल में उसे ले जाया गया। जहां के स्टॉफ ने उसकी मदद की, एक स्वस्थ बच्ची को वहां जन्म दिया गया।
स्कूल स्टॉफ ने 108 को सूचना दी तो 108 ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही एक और बच्ची ने जन्म ले लिया। दोनों बच्चियों के साथ ही महिला को सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल भेजा गया। दोनों बच्चियों के साथ ही मां भी स्वस्थ है।
परिजनों ने बताया कि जैसे ही प्रसव पीड़ा होने लगी तो हम घर पर मौजूद बाइक पर ही उसे ले आए। जल्दबाजी में जननी एक्सप्रेस को भी हम सूचित नहीं कर पाए। जैसे ही प्रसूता को दर्द बढ़ा तो मजबूरन स्कूल में ले जाना पड़ा। गनीमत रही कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें संभाल लिया वर्ना जच्चा-बच्चा को आफत आ जाती।