राजनंदगांव

बंधन बैंक खाते से 29 साइबर फ्रॉड, 52 लाख का संदिग्ध लेनदेन, राजनांदगांव पुलिस ने दर्ज किया केस

Rajnandgaon News: साइबर ठग लोगों को निशाना बनाकर रकम खातों में भेज रहे हैं और फिर उसे अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इधर से उधर ट्रांसफर कर जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
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साइबर ठग
साइबर ठग ( Photo - AI Generated )

Chhattisgarh Cyber Fraud: राजनांदगांव में साइबर ठगी की रकम को बैंक खाते के जरिए आगे बढ़ाए जाने के संदेह का ऐसा ही एक मामला कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है। पुलिस ने एक बैंक खाते में करीब 52 लाख रुपए के कुल लेनदेन का पता लगाया है। खास बात यह है कि समन्वय पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते से 29 ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं।

मामले की शुरुआत एक साइबर शिकायत से हुई, जिसमें ऑनलाइन फ्रॉड के जरिए 30 हजार रुपए की राशि बंधन बैंक के एक खाते में जमा होने की जानकारी सामने आई। एसपी कार्यालय से मिले निर्देश के बाद जिले में लेयर-1 म्यूल बैंक खातों की जांच की जा रही है। इसी दौरान कोतवाली थाना क्षेत्र के इस खाते का कनेक्शन सामने आया।

Rajnandgaon News: लाखों के ट्रांजेक्शन तक पहुंची जांच

कोतवाली टीआई उपेन्द्र शाह के मुताबिक संबंधित बैंक खाते की जांच करने पर उसमें करीब 52 लाख रुपए का कुल लेनदेन पाया गया। इसके बाद समन्वय पोर्टल पर खाते से जुड़ी साइबर शिकायतों की पड़ताल की गई। जांच में एक-दो नहीं, बल्कि 29 ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें इस बैंक खाते से जुड़ी मिलीं। पुलिस जांच में यह खाता मेसर्स कवासा ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर होना पाया गया। खाते के स्वामी बालचंद भुआर्य और राकेश कुमार सिन्हा की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि इस खाते में किन परिस्थितियों में पहुंची और इसके बाद रकम का किस तरह उपयोग अथवा ट्रांसफर किया गया।

हर एंगल से पड़ताल की जा रही

पुलिस ने दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच के बाद मामले में धारा 317(2), 317(4), 317(5) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। अब खाते से जुड़े अन्य बैंक लेनदेन, मोबाइल नंबर और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को म्यूल खातों के माध्यम से आगे भेजे जाने की आशंका रहती है। ऐसे खाताधारक जो जानबूझकर या संदिग्ध परिस्थितियों में ठगी की रकम प्राप्त करने, छिपाने अथवा उसके उपयोग में मदद करते हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले ने यह भी दिखाया है कि साइबर ठगी सिर्फ मोबाइल कॉल, लिंक या फर्जी मैसेज तक सीमित नहीं है, बल्कि ठगी की रकम को आगे बढ़ाने के लिए बैंक खातों की एक पूरी श्रृंखला का इस्तेमाल किया जा सकता है। अब पुलिस की जांच का फोकस इस 52 लाख रुपए के लेनदेन के पीछे मौजूद खातों, लेनदेन की कडिय़ों और संबंधित लोगों की भूमिका पर है।

रकम को कर रहे थे ट्रांसफर

साइबर अपराध की दुनिया में ठगी की रकम को सीधे अपराधी के खाते में रखने के बजाय दूसरे बैंक खातों में भेजने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे खातों को जांच एजेंसियां ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में चिन्हित करती हैं। इन खातों के माध्यम से रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे मूल ठगी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। राजनांदगांव में सामने आया मामला इसी कड़ी में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक खाते से 29 साइबर शिकायतों का जुड़ाव मिला है। हालांकि खाते के धारकों की भूमिका और लेनदेन का वास्तविक स्वरूप पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

Updated on:
18 Sept 2026 01:53 pm
Published on:
18 Sept 2026 01:52 pm