राजनंदगांव

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की नई गाइडलाइन जारी, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय, खुलेंगे 24 नए केंद्र

Paddy Procurement Guidelines: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इस बार किसानों से 15 नवंबर से 15 जनवरी तक ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाएगा।
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Updated: 1 Nov 2026, 2:17 PM IST
Dhan Kharidi New Guidelines
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के नए और सख्त नियम (Photo Source- Patrika File Photo)

Chhattisgarh Paddy Procurement 2026-27: खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर राज्य शासन ने नीति निर्धारित कर दी है। इस बार किसानों से 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक ही धान खरीदा जाएगा। यानी पिछले वर्षों की तुलना में खरीदी की अवधि 15 दिन कम कर दी गई है। पहले 31 जनवरी तक खरीदी होती थी। वहीं, इस वर्ष भी प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदी की सीमा तय की गई है, जिसमें लिकिंग सहित खरीदी शामिल है। धान उपार्जन की जिम्मेदारी मार्कफेड को सौंपी गई है। इधर, खरीदी की तैयारियों के बीच पटवारियों की हड़ताल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

गिरदावरी और अन्य राजस्व कार्य प्रभावित होने से पंजीयन में परेशानी आ रही है। 31 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि निर्धारित थी, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों का पंजीयन और अप्रूवल अटका हुआ है। एग्रीस्टेक में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पटवारी आईडी से अप्रूवल जरूरी है। इसके बाद ही संबंधित किसानों की जानकारी सोसायटी आईडी में प्रदर्शित होगी और खसरा व रकबे के आधार पर टोकन जारी हो सकेगा। ऐसे में पंजीयन की तिथि बढ़ाने की मांग भी तेज होने लगी है। वर्तमान में फसल विवरण शून्य बताया जा रहा, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में बहुत सारे किसान धान बेचने से वंचित हो जाएंगे।

राजनांदगांव जिले में पहले 74 समितियों के अंतर्गत 96 धान उपार्जन केंद्र संचालित थे। इस वर्ष करीब 24 नए केंद्र बढऩे से इनकी संख्या 120 तक पहुंच जाएगी। जिले के सभी खरीदी केंद्रों में 2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन प्रस्तावित है। प्रशासन की ओर से खरीदी से पहले ही बॉर्डर पर निगरानी शुरू कर दी गई है।

नए केंद्रों में बुनियादी इंतजाम अधूरे

नए केंद्रों के लिए जगह चिन्हांकित कर ली गई है, लेकिन समतलीकरण, सुरक्षा घेरा, बिजली-पानी, फड़, कार्यालय, कंप्यूटर, प्रिंटर और सीसीटीवी कैमरों जैसी व्यवस्थाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में ट्रायल रन से पहले तैयारियां पूरी करना चुनौती होगी।

सूखत के मुद्दे पर समितियों की चिंता

सहकारी समितियों को सूखत की मान्यता नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान की आशंका है। पहले से कमजोर वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की समस्या के बीच समितियां इस मुद्दे पर हर साल आवाज उठाती रही हैं। इस बार भी सूखत का मामला खरीदी व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

Updated on:
1 Nov 2026, 2:17 PM IST
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