राजनंदगांव

CG News: नक्सली हमले की सबसे खौफनाक कहानी, घेरकर की थी 29 जवानों की हत्या, 15 जवान हुए थे बर्खास्त

CG News: नक्सलियों ने 9 जुलाई 2012 को कोरकोट्टी के पास एम्बुश लगाकर तत्कालीन एसपी विनोद कुमार चौबे सहित 29 पुलिस जवानों की हत्या कर दी थी। इस बड़ी घटना ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था।

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(Photo AI)

CG News: @मोहन कुलदीप। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में नक्सलवाद की जड़ें वर्ष 1985 से मजबूत होने लगी थीं। सीमावर्ती इलाका होने के कारण नक्सली यहां आसानी से आवाजाही करते रहे और गांव-गांव में अपने दलम खड़े कर संगठन को विस्तार दिया। जन अदालतों के जरिए पुलिस मुखबिरी के शक में हत्याएं आम थीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल था।

नक्सलियों ने 9 जुलाई 2012 को कोरकोट्टी के पास एम्बुश लगाकर तत्कालीन एसपी विनोद कुमार चौबे सहित 29 पुलिस जवानों की हत्या कर दी थी। इस बड़ी घटना ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद हालात इतने भयावह हो गए कि 15 जवानों ने मदनवाड़ा बेस कैंप में ज्वॉइनिंग से इंकार कर दिया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्कालीन एसपी ने जांच के बाद सभी जवानों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।

हमले का नाम ऑपरेशन विकास

नक्सलियों ने इस हमले को ऑपरेशन विकास नाम दिया था। वारदात के बाद उन्होंने जवानों के सारे सामान इकट्ठा किए जिसमें सात एके-47, तीन एसएलआर, 14 इंसास राइफल, 925 कारतूस, 15 ग्रेनेड, 22 बुलेट प्रूफ जैकेट, 14 हेलमेट और एक मोर्टार शामिल था। इसके बाद सबने जश्न भी मनाया।

कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

बर्खास्तगी के खिलाफ जवानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। उस समय पुलिस नक्सलियों के खिलाफ रणनीतिक घेराबंदी और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में जुटी थी, जिसके तहत संवेदनशील इलाकों में कैंप स्थापित किए जा रहे थे।

बढ़ गया था नक्सलियों का दायरा

कोरकोट्टी कांड के बाद नक्सलियों ने मानपुर से लेकर बकरकट्टा और कवर्धा तक कॉरिडोर तैयार कर अपनी पकड़ मजबूत की। सडक़ों, पुल-पुलियों और तकनीकी संसाधनों की कमी का उन्होंने भरपूर फायदा उठाया। सीमावर्ती गांवों में उनकी सक्रियता और हस्तक्षेप बढ़ गया था।

कैंप से थानों तक, बदली तस्वीर

नक्सलवाद पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने मदनवाड़ा, कोहका सहित कई भीतरी इलाकों में कैंप स्थापित किए, जो बाद में थानों में तब्दील हो गए। इससे पुलिस नेटवर्क मजबूत हुआ और ग्रामीणों का विश्वास भी बढ़ा। पहले जहां पुलिस से संपर्क पर ग्रामीणों की हत्या कर दी जाती थी, वहीं अब वे बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं।

अब नक्सल मुक्त

उस समय की परिस्थितियां अलग थीं। लगातार ऑपरेशन और रणनीतिक कार्रवाई के चलते अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला नक्सल प्रभाव से काफी हद तक मुक्त हो चुका है।

वायपी सिंह, एसपी

Updated on:
31 Mar 2026 02:36 pm
Published on:
31 Mar 2026 02:35 pm
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