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72 स्कूली बच्चों को बचाने शिक्षिका ने लगा दी जान की बाजी, डोंगरगांव में बड़ा हादसा टला

Chhattisgarh News: अचानक मधुमक्खियों के हमले से क्लास रूम में अफरा-तफरी मच गई। हमले में 72 विद्यार्थी प्रभावित हुए। इस दौरान शिक्षिका ने सूझबूझ दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बचा लिया..
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मधुमक्खियों के हमले में घायल बच्चे अस्पताल में हुए भर्ती ( Photo - Patrika )

Dongargaon News: छत्तीसगढ़ के डोंगरगांव के बीजाभांठा शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में एक बड़ा हादसा टल गया। पहली कक्षा के दौरान नए स्कूल भवन के छज्जे पर बने छत्ते से अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने क्लासरूम में हमला कर दिया। इस हमले से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और कुल 72 विद्यार्थी प्रभावित हुए। हादसे में 32 छात्र-छात्राओं को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव में भर्ती कराया गया, जबकि 40 बच्चों का स्कूल में ही प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर रूप से प्रभावित तीन छात्राओं विमला (10वीं), भनेश्वरी (12वीं) और नम्रता (11वीं) को सांस लेने में तकलीफ के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा।

Chhattisgarh News: शिक्षिका ने सूझबूझ से लिया काम

कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी ने अपनी जान जोखिम में डालकर सूझबूझ दिखाई। खुद मधुमक्खियों के डंक का शिकार होने के बावजूद, उन्होंने अंतिम बच्चे के सुरक्षित बाहर निकलने तक क्लास नहीं छोड़ी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तीन एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। बीएमओ डॉ. रागिनी चंद्रे ने बताया कि बच्चों को दर्द और बेचैनी की शिकायत थी, लेकिन त्वरित उपचार के बाद अब सभी विद्यार्थी खतरे से बाहर हैं। अधिकांश बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

समय रहते हटाया क्यों नहीं गया?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्कूल भवन पर पहले से मधुमक्खियों का छत्ता मौजूद था तो उसे समय रहते हटाया क्यों नहीं गया? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी या स्कूल प्रबंधन की नजर उस पर नहीं पड़ी, या फिर खतरे को नजरअंदाज किया गया? यदि यह हमला अवकाश के समय या प्रार्थना सभा के दौरान होता, जब सैकड़ों बच्चे एक साथ मैदान में मौजूद रहते, तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी।

क्लास में अफरा-तफरी का माहौल

सुबह पहले पीरियड के दौरान कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी पढ़ाने के लिए कक्षा में पहुंची थीं। तभी अचानक मधुमक्खियों का झुंड बच्चों पर टूट पड़ा। मधुमक्खियों के डंक से घबराए बच्चे चीखते हुए कक्षा से बाहर भागने लगे। कुछ बच्चे जमीन पर गिर पड़े तो कई अपनी जान बचाने के लिए स्कूल परिसर में इधर-उधर दौड़ते रहे। पूरे परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

लंबे समय से था मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता

बताया जा रहा है कि विद्यालय की नई इमारत के छज्जे पर लंबे समय से मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता बना हुआ था। आशंका है कि किसी पक्षी की ओर से छत्ते को छेडऩे के बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और पूरे परिसर में फैल गईं। हालांकि यह केवल संभावना है, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि जब छत्ता पहले से मौजूद था तो उसे हटाने की पहल पहले क्यों नहीं की गई। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।

डोंगरगांव और अर्जुनी से चिकित्सकों की टीम, तीन एंबुलेंस और स्वास्थ्य कर्मी तत्काल स्कूल पहुंचे। 32 विद्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव ले जाया गया, जबकि करीब 40 अन्य बच्चों का विद्यालय परिसर में ही प्राथमिक उपचार किया गया। उन्हें ओआरएस और आवश्यक दवाइयां देकर राहत दी गई।

अस्पताल में भर्ती छात्राओं विमला (कक्षा 10वीं), भनेश्वरी (कक्षा 12वीं) और नम्रता (कक्षा 11वीं) को मधुमक्खियों के कई डंक लगने से सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी होने लगी। डॉक्टरों ने तत्काल ऑक्सीजन देकर उनका उपचार शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से तीनों की हालत में सुधार हुआ।

घबरा गए थे बच्चे

बच्चे काफी घबरा गए थे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव की बीएमओ डॉ. रागिनी चन्द्रे ने बताया कि मधुमक्खियों के काटने से बच्चे काफी घबरा गए थे। तीन बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने पर ऑक्सीजन दिया गया। अब सभी की हालत सामान्य है। अधिकांश बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक छात्रा का उपचार देर शाम तक पूरा कर घर भेजा जाएगा।

छत्ता हटाया जा रहा

प्राचार्य शोभा श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के तुरंत बाद मधुमक्खियों का छत्ता हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित भवन में फिलहाल कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी।

अन्य स्कूलों में भी इसकी जांच हो

फिलहाल बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्कूल परिसरों में सुरक्षा मानकों का समय-समय पर पालन नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं। अब यह देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस घटना से
सबक लेकर प्रदेश के अन्य स्कूलों में भी सुरक्षा जांच अभियान चलाता है या नहीं।

कनक मंडावी ने सुरक्षित निकाला

इस पूरे घटनाक्रम में कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी की बहादुरी भी सामने आई। मधुमक्खियों के हमले के बावजूद उन्होंने खुद की सुरक्षा की चिंता किए बिना सभी बच्चों को सुरक्षित कक्षा से बाहर निकाला। इस दौरान उन्हें भी मधुमक्खियों ने कई जगह डंक मारे, लेकिन उन्होंने तब तक कक्षा नहीं छोड़ी, जब तक अंतिम बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं निकल गया। बाद में वह स्वयं भी बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचीं और उनके उपचार में सहयोग करती रहीं।

सेफ्टी की दिशा में गंभीरता जरूरी

घटना के बाद स्कूल के अन्य शिक्षक भी सक्रिय हुए और बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुट गए। हालांकि इस हादसे ने स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता को फिर से सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल परिसरों में पेड़, बिजली के पोल, भवनों के छज्जे और अन्य स्थानों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए, ताकि मधुमक्खियों के छत्ते या अन्य संभावित खतरों को समय रहते हटाया जा सके। इसलिए स्कूलों में सुरक्षा जांच होनी चाहिए।

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