
बिजली विभाग ‘पॉवरलेस’, 490 पद खाली (photo source- Patrika)
Power Supply Issue: राजनांदगांव जिले में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभाल रही विद्युत वितरण कंपनी खुद गंभीर मानव संसाधन संकट से जूझ रही है। हालात ऐसे हैं कि स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से भी कम मैदानी कर्मचारी पूरे जिले की बिजली व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं को मिल रही सेवाओं पर दिखाई देने लगा है।
हाल के दिनों में रात को हवा-तूफान और बारिश नहीं होने की स्थिति में बार-बार ट्रिपिंग की समस्या आ रही है। विभागीय जानकारी अनुसार लाइन सुपरवाइजर, लाइन इंस्पेक्टर, लाइनमैन, सहायक लाइनमैन, हेल्पर और संविदा कर्मचारियों सहित कुल 669 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से करीब 490 पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में केवल 179 नियमित मैदानी कर्मचारी ही जिले के विस्तृत विद्युत नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।
स्थिति संविदा कर्मचारियों के मोर्चे पर भी संतोषजनक नहीं है। 140 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल 82 संविदाकर्मी कार्यरत हैं। ऐसे में नियमित और संविदा दोनों स्तरों पर स्टाफ की कमी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर, बढ़ते उपभोक्ता और लगातार विस्तार ले रहे बिजली नेटवर्क को देखते हुए जल्द नई भर्ती और रिक्त पदों की पूर्ति आवश्यक है। पर्याप्त तकनीकी अमले की नियुक्ति होने पर ही उपभोक्ताओं को तेज, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
जिले में लाखों उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने, फाल्ट सुधारने, ट्रांसफार्मर और लाइन मेंटेनेंस जैसे महत्वपूर्ण कार्य सीमित कर्मचारियों के भरोसे किए जा रहे हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में शिकायतों की संख्या बढऩे पर कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बन जाता है, जिससे सुधार कार्यों में देरी हो रही। इस बीच उपभोक्ता हलाकान हो जाते हैं, पिछले दिनों रात में ऐसी स्थिति बन गई थी, तो महामाया चौक में आक्रोशित लोगों ने चक्काजाम कर दिया।
बारिश के मौसम में कुछ तकनीकी कारणों के चलते ट्रिपिंग की समस्या रहती है। बिजली गुल कहीं नहीं हो रही। कर्मचारियों की कमी है, उसके बाद भी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा— कौशलेंद्र पांडेय, ईई राजनांदगांव डिवीजन
Published on:
04 Jul 2026 09:49 am
