राजसमंद

VIDEO : सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा- संविधान बदलने की साजिश रच रहे राजनीतिक दल

पत्रिका साक्षात्कार में सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा- हवा में बात नहीं, सबूत से पकड़ा है झूठ
2 min read
Rajsamand news,Rajsamand Hindi news,rajsamand news in hindi,rajsamand latest news rajsamand,Latest News rajsamand,Latest hindi news rajsamand,
VIDEO : सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा- संविधान बदलने की साजिश रच रहे राजनीतिक दल

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता व सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने राजनीतिक दलों व सत्तारुढ़ सरकार पर देश का संविधान बदलने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए जन आंदोलन की चेतावनी दी। चुनाव के मुद्दे राजनीतिक दल अपने फायदे से तय कर लोगों को बहका रहे हैं। केन्द्र सरकार पर रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, बैकिंग सहित 23 वादे झूठलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर एक झूठ की उनके पास सूचना का अधिकार की प्रमाणित प्रतिलिपि है।

यह बात अरुणा राय ने राजसमंद में राजस्थान पत्रिका के विशेष साक्षात्कार में कही। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की वादाखिलाफी की चार्जशीट तैयार की है, जिसमें 23 झूठ मय सबूत के किताब प्रकाशित की है। यह आवाज जन जन तक पहुंचाने के लिए जन सरोकार मंच गठित किया, जिसमें देश के 23 स्वयंसेवी संगठन व अभियान जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि देश में विदेशी कंपनियों को पनपा कर देश के साथ धोखा किया है। राजनीतिक दल वोट के खातिर जाति, धर्म के आधार पर लोगों को बांटने का कार्य कर रहे हैं। हमारे देश का एक टूकड़ा पहले ही पाकिस्तान के रूप में हो चुका है और अब दूसरा टूकड़ा किसी भी स्थिति में नहीं होने देंगे। लोगों में भाईचारे की भावना जाग्रत करने की बजाय वोट की राजनीति में भडक़ाया जा रहा है। लोगों की बेसिक जरूरत रोटी, कपड़ा व मकान है, जिसकी पूर्ति आवश्यक है। देश में जातिवाद, समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन हो रहा है, जिससे यूं लग रहा है कि सोची समझी साजिश के चलते देश के संविधान को बदलने का प्रयास हो रहा है।

सरकार नहीं होने दे रही ऑडिट
मजदूर किसान शक्ति संगठन द्वारा उमरवास व जनावद की तरह अन्य जगह सोशल ऑडिट क्यों नहीं करवाने के सवाल पर अरुणा राय ने कहा कि हम सब जगह ऑडिट नहीं करवा सकते। इसलिए सामाजिक अंकेक्षण का कानून बनाया, मगर राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने एजेंसी ही गठित नहीं की, तो वास्तविक रूप में सामाजिक अंकेक्षण कैसे होगा। अरुणा का आरोप है कि राजस्थान में अभी जो सामाजिक अंकेक्षण हुआ है, वह सिर्फ कागजी खानापूर्ति मात्र है। अंकेक्षण में जो मेंबर बनाए है, ज्यादातर जगह पंच, सरपंच व अफसरों के रिश्तेदार है या मिले हुए हैं। भ्रष्टाचार उजागर होने की वजह से ही तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को भी कमजोर कर दिया। सूचना आयुक्त नियुक्त ही नहीं किए गए, तो सुनवाई कैसे हो। आज हजारों अपीले लंबित पड़ी है।

सुनवाई का कानून भी फ्लॉप
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा ने कहा कि राजस्थान में सुनवाई का अधिकार कानून छह साल पहले लागू किया, मगर पांच वर्ष से वसुंधरा राजे सरकार में कोई पालना नहीं हो पाई। कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है, तो कैसे जनता के कार्य होंगे। कानून बनने के बाद स्वतंत्रत एजेंसी गठित नहीं होने की वजह कोई कार्रवाई नहीं हुई।

Updated on:
26 Apr 2019 11:32 am
Published on:
26 Apr 2019 11:32 am