शहर की शांत दोपहर अचानक सायरनों की तेज गूंज से थर्रा उठी। जे.के. टायर फैक्ट्री से आग लगने की खबर जैसे ही फैली, पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई
राजसमंद. शहर की शांत दोपहर अचानक सायरनों की तेज गूंज से थर्रा उठी। जे.के. टायर फैक्ट्री से आग लगने की खबर जैसे ही फैली, पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई। फैक्ट्री से धुआं उठता देख लोग सहम उठे और आनन-फानन में सायरन बजाती फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ियां धड़धड़ाते हुए मौके की ओर दौड़ पड़ीं। आग की चपेट में आकर छह लोग झुलस गए। उन्हें तुरंत स्ट्रेचर के जरिए फैक्ट्री से बाहर निकालकर एम्बुलेंस से अस्पताल रवाना किया गया। सड़क पर फायर ब्रिगेड की फुर्ती, पुलिस की चुस्ती और प्रशासन की तत्परता ने मानो युद्ध स्तर पर मोर्चा संभाल लिया। लेकिन जैसे ही रेस्क्यू पूरा हुआ, राहत की सांस तब आई जब पता चला—यह सब एक मॉक ड्रिल का हिस्सा था! दरअसल, भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार के निर्देश पर इस हाई-लेवल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। मकसद था किसी भी आपात स्थिति में प्रशासनिक तैयारियों की हकीकत परखना।
जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा, एसपी मनीष त्रिपाठी, एडीएम नरेश बुनकर और एसडीएम बृजेश गुप्ता समेत आला अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहे। पुलिस, सिविल डिफेंस, मेडिकल स्टाफ, अग्निशमन दल, एम्बुलेंस, जेसीबी सहित तमाम संसाधनों ने समय पर पहुँचकर कमाल का रेस्पॉन्स टाइम दिखाया। कलेक्टर असावा ने बताया, “मॉक ड्रिल के जरिए हमने साबित किया कि जिले की टीमें हर आपदा से निपटने को पूरी तरह तैयार हैं। जे.के. टायर का इमरजेंसी नेटवर्क भी बेहतरीन ढंग से सक्रिय रहा।” ड्रिल के अंत में जब लोगों को हकीकत पता चली, तो चेहरे पर डर की जगह मुस्कान लौट आई। यह ड्रिल न सिर्फ तैयारियों की परीक्षा थी, बल्कि एक संदेश भी—राजसमंद का प्रशासन हर संकट से लड़ने के लिए चट्टान की तरह खड़ा है।