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Rajasthan District : राजसमंद का टिकट मांगने पर रेलवे व रोडवेज क्यों देते हैं ‘कांकरोली’ का टिकट, क्या है माजरा?

Rajasthan District : राजस्थान के मानचित्र पर एक स्वतंत्र जिला है राजसमंद। पर पहली बार राजसमंद आने वाले यात्री पूरी तरह से कंफ्यूज हो जाते हैं। हैरानी की बात है कि राजसमंद का टिकट मांगते हैं मिलता है ‘कांकरोली’ का टिकट। पढ़ें राजसमंद जिले के नाम की अनोखी कहानी।

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Rajsamand is most confusing district of Rajasthan Why do Railways and Roadways issue tickets to Kankroli what is matter

फोटो पत्रिका

Rajasthan District : राजस्थान के मानचित्र पर एक स्वतंत्र जिला, लेकिन ज़मीनी हकीकत में अपने ही नाम से बेखबर। यह कहानी है राजसमंद की, जहां जिले की पहचान आज भी पुराने कस्बों के नामों में उलझी हुई है। हैरानी की बात है कि राजसमंद के नाम से रोडवेज बस का टिकट ही नहीं मिलता। बस टिकट में आज भी यात्रियों को गंतव्य के रूप में ‘कांकरोली’ दर्ज किया जाता है, जबकि जिला मुख्यालय, प्रशासनिक इकाई और सरकारी पहचान राजसमंद के नाम से है।

यही नहीं, अजमेर, जयपुर, उदयपुर से आने वाले यात्रियों को ‘राजनगर’ और कांकरोली के नाम से टिकट दिया जाता है। जोधपुर और पाली डिपो से आने वाली बसों में राजनगर के नाम से। भीलवाड़ा डिपो से आने वाली बसों में कांकरोली के नाम से और उदयपुर से आने वाली कुछ बसों में कांकरोली और कुछ में राजनगर के नाम से टिकट जारी किया जाता है।

नतीजा यह कि पहली बार राजसमंद आने वाला यात्री असमंजस में पड़ जाता है कि राजसमंद आखिर है कहां? कई यात्री रास्ते में कंडक्टर, ऑटो चालक और स्थानीय लोगों से बार-बार पूछताछ करते भी नजर आते हैं।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रेलवे स्टेशन का नाम भी आज तक ‘कांकरोली’ ही दर्ज है। जिले के गठन को 35 वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन रेलवे और रोडवेज विभाग अब तक राजसमंद नाम को आधिकारिक रूप से अपनाने में विफल रहे हैं। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस पर भी नाम कांकरोली दर्ज है।

1991 में बना था राजसमंद जिला

राजसमंद जिला 10 अप्रैल 1991 को अस्तित्व में आया था। यह जिला उदयपुर से अलग होकर बना, जिसमें उदयपुर की सात तहसीलें भीम, देवगढ़, आमेट, कुंभलगढ़, राजसमंद, नाथद्वारा और रेलमगरा शामिल की गई थीं। जिले का नाम महाराणा राज सिंह द्वारा निर्मित ऐतिहासिक राजसमंद झील के नाम पर रखा गया, जो मेवाड़ के गौरव का प्रतीक मानी जाती है।

इन क्षेत्रों को मिलाकर राजसमंद नाम दिया

राजनगर, उपनगर धोईंदा, सनवाड़ और कांकरोली इन तीनों क्षेत्रों को मिलाकर जिले का नाम राजसमंद रखा गया था, लेकिन आज भी टिकटिंग सिस्टम और साइन बोर्डों में पुराना नाम ‘कांकरोली’ ही हावी है। यही वजह है कि बाहर से आने वाले यात्रियों, पर्यटकों और व्यापारियों को बार-बार भ्रम और असुविधा का सामना करना पड़ता है।

जिले के नाम से नहीं है साइन बोर्ड

स्थिति यह है कि पूरे जिले में राजसमंद नाम का कोई स्पष्ट और प्रभावी साइन बोर्ड तक नहीं है। उदयपुर से शहर में प्रवेश करने पर हाईवे से अंदर आते ही जो बोर्ड नजर आता है, उस पर भी कांकरोली में आपका हार्दिक अभिनंदन है लिखा हुआ है। इससे साफ जाहिर होता है कि जिला मुख्यालय का नाम तक ज़मीन पर स्थापित नहीं हो पाया है।

पर्यटन, व्यापार और बाहरी संपर्क के लिहाज से यह भ्रम राजसमंद को पीछे धकेल रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते राजसमंद आज भी अपने ही नाम से अनजान बना हुआ है।

यहां पर प्रतिदिन का यात्री ट्रैफिक

90 बसों का प्रतिदिन आवागमन।
15 हजार यात्री कांकरोली।
07 हजार यात्री राजनगर।
1500 यात्री धोईंदा।

पुराने समय से चली आ रही है यह व्यवस्था

पुराने समय से ही यह व्यवस्था चली आ रही है। कुछ डिपो की बसों से राजनगर और कुछ बसों में कांकरोली लिखा होता है। हां ये जरूर है, थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन व्यवस्था बदलने में भी काफी दिक्कत है।
पूर्णेंदु शर्मा, मुख्य मैनेजर, रोडवेज डिपो, राजसमंद

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