राजसमंद

मगरे की माटी के मीठे बोल, बस पता यह है कि मुकाबला त्रिकोणीय

ग्राउण्ड रिपोर्ट : विधानसभा क्षेत्र भीम निर्दलीय के मैदान में आने से दिलचस्प हुआ मुकाबला  
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मगरे की माटी के मीठे बोल, बस पता यह है कि मुकाबला त्रिकोणीय

राजसमंद. एक विधायक यहां से मंत्री बने तो दूसरे को अभी यहां से मगरा विकास बोर्ड अध्यक्ष होने के नाते मंत्री का दर्जा मिला उसी भीम विधानसभा मेें इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प है। मगरों में बिखरे इस क्षेत्र में चुनावी माहौल तो अब दिखने लगा है। लेकिन, जीतेगा कौन इसका जवाब भी यहां लोग अपने अनूठे अंदाज में दे रहे हैं पर पत्ते खोलने के मामले में पूरी गोपनीयता बरत रहे हैं। मगरे की माटी के बोल काफी मीठे हैं और यहां के लोग राजनीति को समझते भी खूब हैं और माहौल की टोह लेना भी इनको खूब आता है। लेकिन, किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए उनसे किए गए सवाल का जवाब भी वे मगरे के घुमावदार और ऊंचे-नीचे रास्तों की तरह ही देते हुए कहते हैं कि देखते हैं सात तारीख को।
भीम विधानसभा मुख्यालय राजसमंद से 99 किलोमीटर दूर है अजमेर, भीलवाड़ा व पाली जिलों से सटा हुआ है। जिला मुख्यालय से जाएं तो गोमती के बाद छापली से ही यह विधानसभा क्षेत्र शुरू हो जाता है। इसके बाद बाघाना, दिवेर और कामलीघाट, देवगढ़ आता है। यहां से हाइवे पर ही आगे बढ़ें तो बरार, बग्गड़ भीम और इसके बाद अजमेर के ब्यावर विधानसभा से सटा जस्साखेड़ा अंतिम पड़ाव है। वहीं, राजमार्ग से अंदर जाएं तो एक तरफ टाडगढ़, मण्डावर, दूसरी ओर ताल, लसानी और मदारिया, आंजना, कालेसरिया, दौलपुरा व कुंवाथल तक यह विधानसभा क्षेत्र फैला हुआ है।
इस विधानसभा क्षेत्र से जीतकर जयपुर गए लक्ष्मणसिंह रावत मंत्री बने तो यहीं से जीतकर हरिसिंह रावत वर्तमान में मगरा विकास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। चुनाव से पहले प्रत्याशी घोषित करने के दौरान यहां खास तौर पर कांग्रेस में सियासत उफान पर थी। जबकि, पूर्व में लगाए जा रहे अनुमान के तहत भाजपा ने वर्तमान विधायक को चौथी बार उतारा तो उसके बाद दावेदारी जताने वाले ठंडे हो गए। इसके बाद सभी की निगाहें कांग्रेस पर थी। यहां यह देखना दिलचस्प था कि 2013 के चुनाव में बागी होकर निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले पूर्व मंत्री लक्ष्मणसिंह रावत को पार्टी टिकट देगी या नहीं और अन्य को देती है तो रावत को समझाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस की तीसरी सूची में लक्ष्मणसिंह के पुत्र सुदर्शन सिंह को जब प्रत्याशी घोषित किया गया तो सारे कयासों पर विराम लग गया। इसके साथ ही जब कभी भाजपा में रहे अजय सोनी ने भी निर्दलीय ताल ठोकी तो यहां मुकाबला त्रिकाणीय हो गया।
मगरों की माटी में रचे-बसे भीम-देवगढ़ क्षेत्र के लोगों की बोली यहां की माटी की सौंधी सुगंध की तरह ही मीठी है। यहां चुनाव में अब तक शांतिपूर्ण रूप से ही मतदान होता आया है। विधानसभा में भीम बड़ा कस्बा है तो देवगढ़ नगर पालिका क्षेत्र है। वहीं, महाराणा प्रताप की रणभूमि दिवेर भी बड़ा कस्बा है। यहां का सबसे बड़ा मुद्दा पानी और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर गोमती से ब्यावर तक अधूरे पड़े फोरलेन का है। पांच साल से ज्यादा समय से अधूरे काम के कारण राजमार्ग पर सैकड़ों हादसे हो चुके हैं। वहीं, बीसलपुर और चंबल से पानी लाने की बातें तो होती रही पर योजना तक नहीं बन पाई। ताल-लसानी पर कुशलपुरा में ताश खेलकर टाइम पास कर रहे ग्रामीणों से बात की तो सभी ने अपने अनुसार माहौल की बात तो की, लेकिन यह नहीं बताया कि किसकी स्थिति मजबूत है। यहां बोरतलाई के पूरणसिंह ने बताया कि मुख्य समस्या पानी की ही है। ऐसे में खेती तो दूर पेयजल की भी किल्लत बनी रहती है। आगे बढ़े तो ताल गांव में एक किराणा की दुकान पर महिलाओं ने बताया कि पानी-बिजली की समस्या मुख्य है। वहीं, सडक़ें भी खराब है। इन्होंने भी माना कि यहां मुकाबला सीधा न होकर त्रिकाणीय है। कालागुन के राकेश सेन ने भी मुख्य समस्या पानी की बताई। लसानी में उदयराम ने अधूरे पड़े हाईमास्ट लाइट के काम को दिखाते हुए शिकायत की। साथ ही बताया कि लसानी से देवपुरा की सडक़ काफी खस्ताहाल है। डालूराम ने बताया कि गांव में पानी की समस्या बरसों है पर किसी ने इसका समाधान नहीं किया। देवगढ़ शहर में सूरज दरवाजा पर सब्जी विक्रेता ने कहा कि वोट का तो सात तारीख को ही तय करेंगे, लेकिन हां कुछ निवारण हुआ पानी जैसी कुछ समस्याओं का अभी समाधान नहीं हो पाया है। देवगढ़ के टैक्सी स्टैण्ड पर बैठे लोगों से बात की तो उन्होंने क्षेत्र में विकट समस्या के बाद भी चम्बल का पानी लाने की योजना तक नहीं बनने की शिकायत की। साथ ही अधूरे फोरलेन की शिकायत की। वहीं, बताया कि पहले कोटा से जोधपुर का हाइवे देवगढ़ से निकलने वाला था, जो आसिंद चला गया। ऐसे में देवगढ़ को भी इस हाइवे से जोडऩा चाहिए। दिवेर में बस स्टैण्ड पर बैठे लोगों से बात की तो उन्होंने राजनीतिक समझदारी का परिचय देते हुए कहा कि कुछ लोग इस चुनाव में मोदी की बात कर रहे हैं, लेकिन हम क्षेत्र के विकास और प्रत्याशी को देखकर ही वोट का निर्णय करेंगे।
तीनों प्रत्याशियों का हाल क्या है?
हरिंसिंह रावत, भाजपा
ताकत : मुख्यमंत्री के करीबी, पूर्व में दावेदारी जताने वालों का समर्थन।
कमजोरी : लगातार तीसरी बार विधायक, फोरलेन का काम पूरा नहीं हो पाया।
सुदर्शन सिंह रावत, कांग्रेस
ताकत : पूर्व मंत्री लक्ष्मणसिंह रावत के पुत्र व नया और युवा चेहरा।
कमजोरी : क्षेत्र में पहले सक्रीय नहीं रहे और नया चेहरा।
अजय सोनी
ताकत : स्थानीय होने के साथ लोगों से सीधा जुड़ाव।
कमजोरी : भीम क्षेत्र में अपेक्षित पकड़ नहीं।
विधानसभा प्रोफाइल
कुल वोटर 207900
पुरुष 106307
महिला १०१५९3
यहां 2008 में भाजपा के हरिसिंह जीते
वोट प्रतिशत
कांग्रेस 37.08
भाजपा 37.80
2013 में भाजपा के हरिसिंह जीते
वोट प्रतिशत
कांग्रेस 5.82
भाजपा 49.70
समस्या दूर करने वाले को वोट
क्षेत्र में पानी और खराब सडक़ों की समस्या है। समस्याओं को दूर करने वाले और विकास के लिए समर्पित प्रत्याशी को चुनेंगे।
भागचंद भील, किसान, लसानी
रोजगार दिलाने वाले को समर्थन
क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं विकास कर जनसुविधाएं दिलवाने व महिला सुरक्षा को महत्व देने वाले को ही समर्थन दूंगी।
सीमा समदानी, गृहिणी, देवगढ़

Published on:
05 Dec 2018 12:19 pm