
Tourism Business Decline: खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध तनाव की आंच अब राजसमंद जिले के पर्यटन उद्योग तक पहुंच गई है। ईरान-इजरायल के बीच बढ़े संघर्ष के बीच कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई बाधित होने से जिले के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में होटल व्यवसाय संकट में आ गया है। गैस आपूर्ति रुकने से कई होटलों की रसोई ठंडी पड़ गई है और भोजन व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कुंभलगढ़ क्षेत्र में करीब 200 से अधिक होटल, रिसॉर्ट और होम-स्टे संचालित हैं। वहीं नाथद्वारा क्षेत्र में लगभग 180 से 200 होटल, गेस्टहाउस और धर्मशालाएं पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा देती हैं। पूरे जिले में कुल मिलाकर करीब 450 से 500 होटल और आवास इकाइयों के संचालन का अनुमान है, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 8 से 10 हजार लोगों को रोजगार मिलता है। कमर्शियल गैस की सप्लाई अचानक रुकने से होटल संचालकों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है।
फिलहाल होटल दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन नई बुकिंग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। होटल संचालकों का कहना है कि गैस आपूर्ति बाधित होने से वे पर्यटकों को पहले की तरह भोजन सहित पैकेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में नई बुकिंग में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल नाथद्वारा में भी हालात लगभग ऐसे ही हैं। श्रीनाथजी मंदिर में प्रतिदिन औसतन 8 से 10 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि सप्ताहांत और त्योहारों के समय यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है। इन श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा होटल और धर्मशालाओं पर निर्भर है। गैस आपूर्ति बाधित होने से यहां भी होटल संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
कुंभलगढ़ क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से व्यावसायिक गैस की किल्लत के चलते पर्यटन व्यवसाय पर स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। गैस की कमी के कारण क्षेत्र की करीब 5 दर्जन होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या आधे से अधिक घट गई है। होटल व्यवसायी शैतान सिंह राठौड़ के अनुसार गैस आपूर्ति बाधित होने से होटल संचालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई होटलों में अब रोटियां तंदूर में बनाई जा रही हैं और भोजन पकाने के लिए परंपरागत चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। पर्यटन प्रेमी कुबेर सिंह सोलंकी का कहना है कि गैस संकट का सीधा असर होटल व्यवसाय पर पड़ा है। पिछले एक सप्ताह में होटलों में पर्यटकों की बुकिंग आधे से अधिक कम हो गई है, जिससे संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
टिकट खिड़की से मिली जानकारी के अनुसार कुंभलगढ़ दुर्ग पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक ही कमी आई है। अधिकांश पर्यटक दुर्ग का भ्रमण कर उसी दिन लौट जाते हैं, इसलिए वहां संख्या में ज्यादा गिरावट नहीं आई। जबकि होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी अधिक देखी जा रही है। पहले इन दिनों में होटलों में लगभग 60 प्रतिशत तक बुकिंग रहती थी, जो इस बार घटकर करीब 20 प्रतिशत तक रह गई है। जहां पहले 20 कमरों में 12–13 कमरे भर जाते थे, वहीं अब केवल 4 से 5 कमरे ही बुक हो पा रहे हैं।
जंगल सफारी संगठन के अध्यक्ष अल्पेश असावा के अनुसार गैस संकट और पर्यटन में आई सुस्ती का असर सफारी पर भी पड़ा है। जहां पहले प्रतिदिन लगभग 20 गाड़ियां जंगल सफारी पर जाती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 6 से 7 गाड़ियों तक रह गई है। यानी वर्तमान में केवल करीब 30 प्रतिशत पर्यटक ही सफारी में पहुंच रहे हैं।
नाथद्वारा में प्रतिदिन श्रद्धालु: 8–10 हजार (पीक पर 20 हजार)
कुल मिलाकर खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब राजसमंद जिले के पर्यटन उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। कमर्शियल गैस सप्लाई ठप होने से होटलों की रसोई ठंडी पड़ रही है और पर्यटन से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।