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SOBHAYATRA : 301 कलश के साथ ठाठ बाट से निकली शोभायात्रा, होदल माता मन्दिर की प्रतिष्ठा

आमेटा कश्यप समाज की कुलदेवी का है मंदिर
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कुंभलगढ़. केलवाड़ा स्थित आमेटा का वास में रविवार को आमेटा कश्यप समाज की कुल देवी होदल माता के नवनिर्मित मन्दिर पर शिखर, ध्वजा, दंड एवं माता की मूर्ति प्राण की प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। जय अंबे नवयुवक मंडल की ओर से आयोजित मन्दिर एवं मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान को बांसवाड़ा के बागीदौरा से आए आचार्य पूर्णाशंकर जोशी, जय शंकर जोशी, दीपक जोशी, शांतिलाल जोशी एवं चन्द्रेश्वर जोशी के सानिध्य में तीन दर्जन पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ चार दिवसीय ११ कुण्डीय शतचंडी यज्ञ हवन कर पूर्ण करवाया। जिसकी पूर्णाहुति दोपहर को शुभ मुहूर्त में सम्पन्न हुई। वहीं मन्दिर के शिखर, ध्वजादंड एवं मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान भी सम्पन्न करवाया गया। इससे पूर्व शनिवार शाम को समाज के युवक, युवतियां एवं समाज जनों की ओर से कस्बे में वरघोड़ा निकाला गया एवं रात को भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें गायक कलाकार लेहरूदास वैष्णव, सोनू सिसोदिया एवं राजू वैष्णव ने भोर तक एक से बढकर एक भजनों की प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। कार्यक्रम के तहत रविवार सुबह समाजजनों ने केलवाड़ा के धोलीवा कुएं से मुख्य बाजार होते हुए आमेटा वास होदल माता मन्दिर तक बैण्डबाजों की स्वर लहरियों एवं ढोल, थाली मादल के साथ ३०१ कलश के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली। जिसमें समाज के वरिष्ठ राधेश्याम आमेटा एवं माधवलाल आमेटा के अलावा कार्यकत्र्ता युवक एवं युवतियां मौजूद थी।

सांसारिक मोह में फंसी है जीवात्मा: भारद्वाज
रेलमगरा (एस). कस्बे के रामद्वारा परिसर चल रही श्रीमद भागवत कथा में पंडित अशोक भारद्वाज के कहा कि जीवात्मा सांसारिक मोह में फंसी है। इसलिए हमें भगवान का दर्शन नहीं होता है। हम सत्य के निकट होकर भी उससे दूर रहते हैं। मोह-माया में फंसा व्यक्ति संसारिक वस्तुओं में फंसा रहता हैऔर मनुष्य जीवन के उद्देश्यों को भूल जाता है। इस दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण की रासलीलाओं के भी मार्मिक प्रसंग श्रोताओं को सुनाए। बाद में छप्पन भोग का आयोजन किया गया। इस दौरान मोहनलाल जाट, श्रीराम विजयवर्गीय, सुरेश चन्द्र, नन्दलाल, प्रभुलाल, रामदयाल आदि मौजूद थे।

नृसिंह अवतार के दर्शन का लिया लाभ
नाथद्वारा. नृसिंह चतुर्दशी के अवसर पर रविवार को सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने सायंकाल शयन के समय हुए विशेष दर्शनों का लाभ लिया। इस दौरान शालीग्रामजी को पंचामृत स्नान भी कराया गया। आराध्य प्रभु के ये विशेष दर्शन देर शाम खुले। इस दौरान ठाकुरजी के दर्शन के साथ साथ श्रीजी के संमुख श्रीनाथजी के बड़े मुखिया इन्द्रवदन गिरनारा आदि के द्वारा शंखनाद के साथ शालीग्रामजी को दूध, दही, मिश्री के बूरा, घी, शहद आदि से पंचामृत स्नान कराया गया।

Published on:
30 Apr 2018 06:07 pm