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Rajasthan Politics: ‘कांग्रेस के लिए मांगूंगा वोट’, मतदान से ऐन पहले अचानक पलटा भाजपा प्रत्याशी; गरमाई सियासत

Nathdwara nagar palika Election: नाथद्वारा नगरपालिका चुनाव में नामांकन वापसी के दिन शुरू हुआ सियासी घटनाक्रम मतदान से ठीक तीन दिन पहले फिर सुर्खियों में आ गया। भाजपा प्रत्याशी ने कहा कि वो कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे।
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Congress V/S BJP

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नाथद्वारा। नगरपालिका चुनाव में नामांकन वापसी के दिन शुरू हुआ सियासी घटनाक्रम मतदान से ठीक तीन दिन पहले रविवार को फिर सुर्खियों में आ गया। वार्ड 23 से भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रजापत ने मीडिया के सामने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी को खुद से अधिक योग्य बताते हुए उनके पक्ष में वोट मांगने की बात कहकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट मांगेंगे। दिनेश प्रजापत ने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से उनका नामांकन जल्दबाजी में करवाया गया था।

उन्होंने बताया कि 3 सितंबर को नामांकन वापस लेने के लिए पहुंचे थे, लेकिन वहां से पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार पुलिस कई घंटों तक उन्हें गाड़ी में घुमाती रही। दिनेश ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आना उचित समझा। उन्होंने वार्ड 23 के मतदाताओं से कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील करने की बात कही।

नामांकन वापसी के दिन चला था सियासी ड्राम

गौरतलब है कि 3 सितंबर को नामांकन वापसी के अंतिम दिन दिनेश प्रजापत के नामांकन वापस लेने की सूचना के बाद वार्ड में राजनीतिक माहौल गरमा गया था। भाजपा कार्यकर्ता उन्हें नामांकन वापस लेने से रोकने पहुंचे थे। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गहमागहमी और झड़प की स्थिति बन गई थी। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मोर्चा संभाला और दिनेश प्रजापत को अपने साथ ले गई थी।

भाजपा संगठन के सामने खड़े हुए कई सवाल

अब मतदान से पहले दिनेश के खुले तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में आने से वार्ड 23 का चुनाव और अधिक रोचक हो गया है। इस घटनाक्रम ने भाजपा संगठन के सामने प्रत्याशी चयन, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

भीतरघात का डर

चुनाव में केवल सामने खड़े प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला ही चुनौती नहीं है। टिकट वितरण के बाद भीतरघात की संभावनाएं भी चिंता का कारण बन रही है। लंबे समय से टिकट की तैयारी कर रहे दावेदारों को मौका नहीं मिला। ऐसे में उनके साइलेंट विरोध का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा के लिए खासतौर पर बागियों को साधना अहम चुनौती होगी, क्योंकि एक ओर अधिकृत प्रत्याशी को जीत दिलाने की जिम्मेदारी होगी तो दूसरी ओर असंतुष्ट दावेदारों को मनाने की कवायद भी करनी पड़ रही है।