
प्रमोद भटनागर
नाथद्वारा. पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ प्रभु श्रीनाथजी की नगरी में फागुन की रंगत यूं तो बसंत पंचमी से ही प्रारंभ हो जाती है, परंतु फागुन मास की शुरुआत होली का डंडा रोपण के साथ मंगलवार से हुई। वहीं, होरी की धमार भी इसके साथ ही प्रारंभ हो गई। माघ पूर्णिमा पर आराध्य प्रभु श्रीनाथजी को अलौकिक शृंगार भी धराया गया।
आराध्य प्रभु श्रीनाथजी मंदिर की परंपरानुसार सायंकाल सवा छह बजे निज मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के यहां से मंदिर के कीर्तनकार कीर्तन करते हुए रवाना हुए। वे मंदिर मार्ग, लाल बाजार, केशव कॉम्पलेक्स, फौज मोहल्ला होकर होलीमगरा पहुंचे, जहां मंदिर की जमीन पर होली का डंडा पूजा-अर्चना के साथ रोपा गया। इस दौरान खर्च भंडार के भंडारी फतहलाल गुर्जर, मंदिर के पंड्या परेश नागर, परछना के नवनीत लाल सनाढ्य, मशालची भरत वर्मा भी मौजूद थे। इससे पूर्व मंदिर से उस्ता खाना के कर्मचारी होली के डंडे को लेकर कीर्तनकारों के साथ चल रहे थे। इस दौरान मंदिर से लेकर होलीमगरा तक श्रीनाथ गार्ड हाथ में बंदूक लेकर धमाके करते हुए भी साथ चल रहे थे।
धराया विशेष शृंगार
आराध्य प्रभु श्रीनाथजी को मंगलवार को माघ पूर्णिमा पर विशेष शृंगार धराया गया। इसमें श्रीजी बावा को श्रीनाथजी के मुखिया प्रदीप सांचीहर के द्वारा धवल आभा का शृंगार धराया एवं सोने के आभूषण भी सुशोभित कराये गए । राजभोग की झांकी के समय आराध्य प्रभु को गुलाल की सेवा धराते हुए धवल पिछवाई पर लाल रंग से गुलाल से चिडिय़ा बनाई गई। वहीं, इसके बाद डोल तिबारी में खड़े श्रद्धालुओं पर गुलाल भी उड़ाई गई।
होली का डण्डा रोपा, एक माह तक चलेगा रसिया गान
चारभुजा. धर्मनगरी में मंगलवार को शुभ मुहूर्त में शाम 4.15 बजे होली का डण्डा रोपा गया। डण्डा रोपण से पूर्व पं. योगेश दवे ने स्थानीय सरपंच नाथूलाल गुर्जर के सानिध्य में होली के डण्डे की पूजा-अर्चना करवाई। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से डण्डा रोपण किया गया। इसके साथ ही चारभुजाजी मंदिर मे पुजारियों द्वारा एक माह तक नक्कार चौक पर चारभुजाजी की शयन आरती के बाद रसिया गान व हरजश का स्तवन प्रारम्भ हो जाएगा, जो चंग की थाप पर चलेगा। डण्डा रोपण के समय कान्हैयालाल कावडिय़ा, मांगीलाल सिंघवी, प्रकाश टेलर, शांतिलाल टेलर, गणेशदास, प्रेमराज सेवक, वनराज गुर्जर, प्रकाश वैष्णव, घीसुलाल चौहान, रमेश नाई, धर्मचन्द सेवक, जालमसिंह सोलंकी, शंकरलाल सेवक, रामलाल राजावत, नन्दलाल सेवक बंशीलाल सुथार मौजूद थे।