
राजसमंद पुलिस की गिरफ्त में साइबर ठगी करने का आरोपी (पत्रिका फोटो)
राजसमंद: साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में राजसमंद साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ 80 लाख 40 हजार रुपए की साइबर ठगी के मामले का खुलासा किया है। पुलिस टीम ने करीब 17 दिनों तक बिहार, झारखंड, रांची, जामताड़ा, पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी-दरभंगा, दार्जिलिंग और असम के गुवाहाटी सहित कई स्थानों पर पड़ताल एवं गहन तलाश के बाद रैकेट के प्रमुख सदस्य दीपू उर्फ डेण्डी उर्फ छोटू मंडल को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजसमंद के समक्ष पेश किया गया। उसके कब्जे से 44 सिमकार्ड, 5 डेबिट कार्ड और साइबर अपराध में प्रयुक्त 4 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान जयपुर द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेन्द्र पारीक एवं विशेष अभियान के नोडल अधिकारी व साइबर पुलिस थाना राजसमंद के थानाधिकारी दुर्गा प्रसाद दाधीच, आरपीएस के निकटतम सुपरविजन में कार्रवाई की गई।
साइबर पुलिस थाना राजसमंद में दर्ज प्रकरण में बताया कि आरोपी ने प्रार्थी से 2 करोड़ 80 लाख 40 हजार रुपए की ठगी कर ली। इस पर जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई। मनी ट्रेलिंग एवं तकनीकी सहयोग से जांच में सामने आया कि साइबर धोखाधड़ी के इस रैकेट के तार नेपाल, चीन, श्रीलंका और कंबोडिया से जुड़े हैं। भारत में इसका संचालन मुख्य रूप से सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल और असम की तरफ से होना पाया गया।
पुलिस टीम ने गिरोह तक पहुंचने के लिए करीब 17 दिनों तक बिहार, झारखंड, रांची, जामताड़ा, पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और असम के गुवाहाटी सहित विभिन्न स्थानों पर पड़ताल की। इसके बाद दीपू मंडल को देवीडंगा बाबूबासा चम्पासरी सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में दीपू मंडल ने बताया कि वह काठमांडू नेपाल निवासी आन छिरिंग शेरपा तथा चीन निवासी रूआन उर्फ राम जो वर्तमान में श्रीलंका से संचालित साइबर धोखाधड़ी के रैकेट को भारत में चलाने का काम करता है, के लिए कार्य करता था। आरोपी देश के विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी में उपयोग के लिए मोबाइल, सिमकार्ड और बैंक खाते प्रलोभन देकर एकत्रित करता था। इसके बाद इन खातों के माध्यम से ठगी की राशि एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करता था।
राशि ट्रांसफर करने के लिए विदेशों में बैठे संचालकों द्वारा दी गई एपीके एप्लीकेशन जैसे सेंड एसएमएस आदि को मोबाइल में इंस्टॉल कर बैंक खातों की समस्त जानकारी संचालकों को देता था। ऑनलाइन ठगी से प्राप्त राशि का सेटलमेंट करने के बदले उसे कमीशन के तौर पर यूएसडीटी मिलती थी, जिसे वह क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर बेचकर भारतीय मुद्रा प्राप्त करता था। पुलिस के अनुसार, भारत में पंजाब, गुजरात, तेलंगाना और बिहार सहित अन्य राज्यों में भी सहअभियुक्त मुख्य आरोपी रूआन उर्फ राम के लिए काम कर रहे हैं, जिनकी तलाश एवं गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के संचालक कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में कॉल सेंटर संचालित करते हैं। गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं डेटिंग वेबसाइट्स पर महिलाओं के नाम से फर्जी आईडी बनाकर भारत के लोगों से संपर्क करते हैं। लुभावनी बातें कर ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के प्लान बताए जाते हैं और निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है।
व्यक्ति के एक बार रुपए निवेश करने के बाद अलग-अलग तरीकों और बहानों से उससे और अधिक निवेश करवाकर साइबर ठगी की जाती है। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर घुमाने के बाद ऑनलाइन फर्जी बैटिंग एवं गेमिंग वेबसाइटों तथा क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट किया जाता है। इसके बाद क्रिप्टो करेंसी को अन्य देशों में बेचकर नकद राशि प्राप्त कर ली जाती है।
पुलिस के अनुसार साइबर ठग ठगी से प्राप्त राशि को विभिन्न गेमिंग प्लेटफॉर्म एवं बैटिंग साइट्स के माध्यम से लोगों के बैंक खातों में बैट में जीती हुई राशि के रूप में ट्रांसफर कर देते हैं। राशि खाते में पहुंचते ही खाते फ्रिज हो सकते हैं। वहीं, बैटिंग में लगाए गए जिन रुपयों पर कोई शिकायत नहीं होती, उन्हें फ्रॉडर अपने द्वारा खरीदे गए म्यूल बैंक खातों में प्राप्त कर लेते हैं और बाद में क्रिप्टो करेंसी या हवाला के जरिए नकद प्राप्त करते हैं।
पुलिस ने आमजन से ऑनलाइन गेमिंग एवं बैटिंग एप्लीकेशन में रुपए निवेश नहीं करने की अपील की है। पुलिस ने चेताया कि ऐसा करना साइबर अपराध के चंगुल में धकेल सकता है, बैंक खाते अनिश्चित समय के लिए फ्रिज हो सकते हैं और आपराधिक कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से संपर्क नहीं करने, फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर भरोसा नहीं करने तथा बैंक खाता, सिमकार्ड और ईमेल जैसी जानकारी किसी व्यक्ति को उपयोग के लिए नहीं देने की अपील की गई है। पुलिस ने गेमिंग वेबसाइटों पर किसी प्रकार की राशि न भेजने और न ही प्राप्त करने का भी आग्रह किया है।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आमेट थाना पुलिस ने साइबर ठगी की कंबोडियाई गैंग का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बबलु सिंह पुत्र करण सिंह, जाति राजपूत, उम्र 20 वर्ष, निवासी बाण्डा, थाना आमेट, राजसमंद के रूप में हुई है। पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर मामले की जांच में जुटी है।
जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के निर्देशानुसार, फ्रॉड एवं विभिन्न अपराधों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत थानाधिकारी रोहित कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूची के अनुसार म्यूल खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए खाते का संबंधित बैंक से रिकॉर्ड प्राप्त किया गया। जांच में सामने आया कि यह खाता बबलू सिंह के नाम पर है। इस खाते पर साइबर शिकायत दर्ज करने की बात भी सामने आई। इस पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया गया।
पुलिस पूछताछ एवं अनुसंधान में सामने आया कि बबलू सिंह पहले कंबोडिया में साइबर ठगों के साथ मिलकर साइबर ठगी का काम करता था। साइबर ठगी की कंपनी पर रेड पड़ने के बाद कंपनी बंद हो गई और बबलू सिंह भारत वापस आ गया। भारत आने के बाद भी वह लगातार साइबर ठगों के संपर्क में रहा।
अनुसंधान में यह भी सामने आया कि वह साइबर ठगी से प्राप्त रकम अपने बैंक खाते में लेता था और साइबर ठगों के कहे अनुसार उसे यूएसडी डॉलर में बदलकर वापस उन्हीं को भेजता था। पुलिस ने आरोपी बबहू सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और उससे आगे की पूछताछ एवं अनुसंधान जारी है।
Updated on:
17 Aug 2026 05:13 pm
Published on:
17 Aug 2026 05:13 pm
