
घरों से निकलने वाले कचरे को घर-घर जाकर ऑट्रो ट्रीपर के माध्यम से संग्रहित किया जाता है। इस कचरे को गाडरियावास में बने ट्रेचिंग ग्राउण्ड में ऑटो ट्रीपर, ट्रेक्टर और ट्रक के माध्यम से पहुंचाया जाता है। लेकिन इस कचरे को वहां तक पहुंचाने के लिए उसे ढककर ले जाने के निर्देश है, इसके बावजूद कचरे को बिना कवर किए ले जाता है। कई बार कचरा ओवर फ्लो भरा रहता है। इसके कारण कचरा रोड पर फैलता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार इस और ध्यान नहीं देते हैं। इसके कारण आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। राजस्थान पत्रिका की टीम पिछले दो दिनों में कचरा लेकर जाने वाले ट्रैम्पो, ट्रेक्टर और डम्पर की ली जानकारी।
केस 1
राजनगर स्थित बजरंग चौराहा से कचरे से भरा ट्रेक्टर जा रहा था, ओवरफ्लो होने के कारण उसमें भरा कचरा रोड पर बिखर रहा था। हवा के साथ पॉलीथिन की थैलियां पीछे चलने वाले वाहन चालकों पर गिर रही थी।
केस 2
ठेकेदार का कर्मचारी गाडरियावास रोड से कचरे से भरा ट्रेक्टर ट्रेचिंग ग्राउण्ड में खाली करने जा रहा था। कचरे से धुंआ उठ रहा था। इसे भी कवर करके नहीं ले जा रहा था। स्पीड ब्रेकर आदि पर कचरा रोड पर गिर रहा था।
केस 3
कचरा पात्रों में भरे कचरे को डम्पर के माध्यम से गाडरियावास पहुंचाया जाता है। ईदगाह मस्जिद के पास से गुजर रहे डम्पर में कचरा भरा हुआ था और उसे भी कवर नहीं किया गया। थैलियां हवा से उडकऱ फैल रही थी।
केस 4
शहर के समारोह स्थल के बाहर पड़े कचरे को ऑट्रो ट्रीपर में भरकर ले जा रहे थे। इसमें भरे प्लास्टिक के गिलास और अन्य कचरा रोड पर फैलता जा रहा। यह पूरे शहर से होकर ट्रेचिंग ग्राउण्ड तक इसी हालत में गया।
केस 5
शहर की मुख्य सडक़ों पर तडक़े स्थायी कर्मचारियों से सफाई कराई जाती है। कचरे को एकत्र कर उसे पास में रखे कचरा पात्र में डालना होता है, लेकिन सफाई कर्मी उसे एकत्र कर कचरा पात्र में डालने से बचने के लिए उसे जला देते हैं। शहर में कई स्थानों पर कचरे को जलाया जा रहा है। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है।