राजसमंद. राजस्थान के राजसमंद जिले में आम आदमी के लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। पेट्रोल-डीजल, रोजमर्रा की सब्ज़ियां और बच्चों की स्कूल फीस तीनों ने घरेलू बजट को कस कर जकड़ लिया है। ऐसे में फरवरी में पेश होने वाले राजस्थान सरकार के बजट 2026-27 से लोगों की निगाहें टिकी हैं कि […]
राजसमंद. राजस्थान के राजसमंद जिले में आम आदमी के लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। पेट्रोल-डीजल, रोजमर्रा की सब्ज़ियां और बच्चों की स्कूल फीस तीनों ने घरेलू बजट को कस कर जकड़ लिया है। ऐसे में फरवरी में पेश होने वाले राजस्थान सरकार के बजट 2026-27 से लोगों की निगाहें टिकी हैं कि क्या यह बजट महंगाई पर काबू पाने में कारगर साबित होगा या नहीं। सबसे पहले बात ईंधन की। जनवरी 2026 में राजसमंद में पेट्रोल की कीमत करीब 105.60 प्रति लीटर और डीजल 91.10 प्रति लीटर दर्ज की गई। यह राष्ट्रीय औसत (पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03) से अधिक है। इसकी मुख्य वजह राज्य स्तर पर लगने वाला ऊंचा वैट माना जाता है। ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से सब्ज़ी, दूध, अनाज और रोजमर्रा की सेवाएं भी महंगी हो जाती हैं।
महंगाई के राष्ट्रीय आंकड़े भले राहत का संकेत दें—सितंबर 2025 में सीपीआई महंगाई दर 1.54 प्रतिशत तक आ गई थी, जो आठ साल का निचला स्तर रहा, लेकिन राजसमंद जैसे जिलों में स्थानीय बाजार की तस्वीर अलग है। यहां खाद्य और ऊर्जा महंगाई का असर आम परिवार की जेब पर साफ दिखाई देता है।
सब्ज़ियों के भाव इसका बड़ा उदाहरण हैं। 20 जनवरी 2026 को राजसमंद मंडी में आलू 700 रूपए प्रति क्विंटल और टमाटर 1200 रूपए प्रति क्विंटल के भाव बिके। इन दरों पर एक औसत 4-5 सदस्यीय परिवार को केवल सब्ज़ियों पर ही 3,000 से 4,500 प्रति माह खर्च करने पड़ रहे हैं। गृहणियों का कहना है कि महीने का बजट अब रसोई से ही बिगड़ने लगता है।
महंगाई का तीसरा बड़ा दबाव स्कूल फीस है। राजसमंद के निजी स्कूलों में नर्सरी से कक्षा 1 तक सालाना फीस करीब ₹30,000, कक्षा 6-8 में ₹45,000 और 9-10 में ₹47,000 से ₹50,000 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा किताबें, यूनिफॉर्म और परिवहन का खर्च अलग। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई भले कम खर्चीली हो, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कई अभिभावक मजबूरी में निजी स्कूल चुनते हैं।
ऐसे में बजट 2026-27 से राजसमंद की जनता की अपेक्षाएं साफ हैं। पहली पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती या सब्सिडी, ताकि ईंधन सस्ता हो और महंगाई की चेन टूटे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ईंधन के दाम 3-4 रुपये प्रति लीटर भी घटते हैं तो एक मध्यमवर्गीय परिवार को सालाना 6,000 से 10,000 तक की राहत मिल सकती है। दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों जैसे अनाज, सब्ज़ी और गैस पर सीधी सब्सिडी और किसानों को सहायता, ताकि आपूर्ति सस्ती रहे। तीसरी स्कूल फीस पर नियमन या शिक्षा सहायता योजनाएं, जिससे अभिभावकों का बोझ कम हो। चौथी रोजगार सृजन, ताकि बढ़ती आय के जरिए महंगाई का असर कुछ हद तक संतुलित हो सके।
आगामी बजट में सिर्फ विलसिता की वस्तुएं, महंगी कारें,हर प्रकार के नशे की सामग्री आदि को बहुत महंगी कर आमजन एवं गरीब तबके के काम आने वाली खाद्य सामग्री को सस्ता किया जाए। पेट्रोल-डीजल जो दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। इसके महंगे होने से दैनिक जीवन की हर वस्तु महंगी हो गई हैं। स्कूल बसों का मासिक भाड़ा व स्कूल की फीस महंगी है। इन पर लगाम लगा राहत दी जानी चाहिए।
खलील डायर, राजसमंद
गरीब वर्ग को आटा ,दाल ,चावल,तेल,सब्जी की पूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर ड़ रहा है। बढ़ती महंगाई का असर मध्यम वर्ग पर भी देखने को मिला है। ऐसे में सरकार को बजट में महंगाई कम करने की दिशा में काम करना चाहिए। बजट में ऐसे प्रावधान हो कि लोगों को दैनिक जीवन की उपयोगी चीजों को इश्तेमाल करने में परेशान ना हो।
शंकुतला पामेचा, गृहिणी, राजसमंद