राजसमंद. राजस्थान के शिक्षा जगत में नई ऊर्जा और दिशा तय करने के उद्देश्य से शुक्रवार को ऐतिहासिक नगरी कुंभलगढ़ में दो दिवसीय ‘शिक्षा चिंतन शिविर’ की शुरुआत हुई। इस आयोजन में देशभर से आए शिक्षाविद, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ जुटे। उद्घाटन करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा – “महाराणा प्रताप की यह वीरभूमि […]
राजसमंद. राजस्थान के शिक्षा जगत में नई ऊर्जा और दिशा तय करने के उद्देश्य से शुक्रवार को ऐतिहासिक नगरी कुंभलगढ़ में दो दिवसीय ‘शिक्षा चिंतन शिविर’ की शुरुआत हुई। इस आयोजन में देशभर से आए शिक्षाविद, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ जुटे। उद्घाटन करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा – “महाराणा प्रताप की यह वीरभूमि हमेशा जागृति का संदेश देती रही है। हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनानी है, जो बच्चों को केवल सफल ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनाए।”
मदन दिलावर ने कहा हर बच्चे को स्कूल तक लाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है।रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता होगी। स्कूल भवनों की निर्माण अवधि व जीवनकाल तय करने की योजना बनाई जा रही है ताकि समय रहते उन्हें सुरक्षित बदला जा सके। ड्रॉपआउट दर शून्य करने और भारतीय ज्ञान परंपरा को हर विद्यार्थी तक पहुँचाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दो दिन के इस शिविर से जो “अमृत” निकलेगा, उससे पूरा प्रदेश लाभान्वित होगा।
विशिष्ट शासन सचिव विश्वमोहन शर्मा ने बताया कि राजस्थान ने शिक्षा में कई नवाचार किए हैं कि श्रीकृष्ण भोज पहल–किसी भी परिवार में शुभ अवसर पर विद्यालय में सामूहिक भोज का आयोजन। इस पहल की सराहना केंद्र सरकार तक कर चुकी है। अतिथि माता योजना में रोज़ तीन माताएं विद्यालय जाकर मिड-डे मील की गुणवत्ता परखती हैं। न्यूट्री गार्डन से स्कूल परिसर में ही सब्जियां उगाकर बच्चों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना। बच्चों को श्रीअन्न(मिलेट्स) परोसने की परंपरा बढ़ाना।
राजस्थान शिक्षा विभाग की उपलब्धियां
चिंतन शिविर के पहले दिन देशभर से आए शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने विचार रखे।