
राजसमंद. जिले में एक डेढ़ दशक में नियुक्त ज्यादातर पुलिस एवं प्रशासनिक अफसरों ने अपनी काली कमाई और भ्रष्टाचार के पैसो से कुंभलगढ़ क्षेत्र में अरबों की बेनामी सम्पत्तियां खड़ी कर दी है। जिस तरह शीर्ष नेताओं, कारोबारियों का स्वीस बैंकों में कालाधन जमा है, उसी तरह अधिकारी कुंभलगढ़ क्षेत्र में जमीन खरीदकर व होटलों में निवेश कर बेनामी सम्पत्ति के रूप में कालाधन बना रहे हैं। डेढ़ दशक पहले तक जो अफसर मार्बल उद्योग या खानों की चाहत रखते थे, वे आज कुंभलगढ़ क्षेत्र में बेशकीमती जमीन खरीदने या होटल बनवाने में रूचि दिखा रहे हैं।
कुंभलगढ़ क्षेत्र में दो दशक में तीन से चार गुना पर्यटक बढ़े हैं, जिसे होटल कारोबार भी परवान चढऩे लगा है। दुर्ग भ्रमण, अभ्यारण्य की सैर करने वाले लोग भी काफी बढऩे लगे हैं। ऐसे में गवार, केलवाड़ा व वरदड़ा पंचायत क्षेत्र में वर्तमान में 50 से सामान्य होटलों से लेकर ज्यादा थ्री स्टार से लेकर फाइव स्टार तक की होटलें संचालित है। करीब पन्द्रह से ज्यादा होटलें वर्तमान में निर्माणाधीन है। ज्यादातर अफसरों ने होटल कारोबारियों से मिलीभगत कर अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाते हुए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर साझेदार बन रहे हैं, जबकि कई अफसरों ने परिजन, रिश्तेदार या नजदीकी परिचित के नाम जमीन खरीद ली है। यही नहीं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा एक दशक में राजसमंद, उदयपुर व पाली जिले में रिश्वत लेते पकड़े गए कई पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की काली कमाई के तार कुंभलगढ़ की अरावली की वादियों तक से जुडऩे होने के तथ्य सामने आए हैं। काली कमाई करते कुंभलगढ़ के दो प्रशासनिक अधिकारी भी धरे गए।
एक नजर में वर्तमान स्थिति
48 से ज्यादा होटलें
15 से ज्यादा होटलें निर्माणाधीन
35 से अधिक ढाबा- रेस्टोरेंट
दो करोड़ में बिक रही जमीन
कुंभलगढ़ क्षेत्र में डीएलसी दर 470 से पांच सौ रुपए तक निर्धारित है, जबकि डेढ़ से दो करोड़ रुपए प्रति बीघा की दर से जमीनें बिक रही है। राजसमंद जिले नाथद्वारा और कुंभलगढ़ ही एकमात्र ऐसे स्थल है, जहां सर्वाधिक पर्यटक आ रहे हैं।
करेंगे जरूर कार्रवाई
अगर कोई भ्रष्टाचार का मामला है। ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो उसकी गहनता से जांच करवा ली जाएगी। फिर उसी आधार पर अग्रिम कार्रवाई अमल में लाएंगे।
हिंगलाज दान, डीआईजी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उदयपुर