राजसमंद

बिलखते हुए शहीद के बेटे ने कहा- सेना में भर्ती होकर आतंकियों से लूंगा पिता की मौत का बदला

जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले में देश के लिए शहीद हुए जवान नारायण लाल गुर्जर के गांव में लोग शहीद के परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।
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Feb 16, 2019
MUkesh Gurjar

राजसमंद। जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले में देश के लिए शहीद हुए जवान नारायण लाल गुर्जर के गांव में लोग शहीद के परिवार को सांत्वना दे रहे हैं, लेकिन दर्द रुकने का नाम नहीं ले रहा। गांव के सन्नाटे को शहीद के घर से उठ रही चीत्कार की आवाज चीर रही थी।

राजसमंद जिले के बिनोल गांव में 38 साल के शहीद नारायण लाल की बहादुरी के किस्से हर बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक की जुबां पर सुनाई दे रहे हैं। पूरा गांव अपने इस देशभक्त बेटे को आखिरी बार देखने को बेताब है। शहीद के परिजनों के अनुसार नारायण सप्ताहभर की छुट्टियां पूरी कर मंगलवार को ही गांव से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे।

शहीद नारायण लाल के परिवार में माता-पिता का देहांत हो चुका है। पत्नी मोहनी देवी (36), पुत्री हेमलता (17) और पुत्र मुकेश (11) हैं। एक भाई गोवर्धन लाल, काका रामलाल गुर्जर के अलावा अन्य रिश्तेदार हैं। 7वीं कक्षा के छात्र मुकेश ने कहा कि मैं भी सेना में भर्ती होकर आतंकवादियों से अपने पिता की मौत का बदला लूंगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों को चुन-चुनकर मारना चाहिए।

पुलमावां आतंकी हमले की ज्योंही सूचना गांव तक पहुंची तो घर-परिवार के लोगों और ग्रामीणों में दहशत सी फैल गई। लापता जवानों की सूची में नारायणलाल का नाम आते ही उनके दिलों की धडक़नें और बढ़ गईं। जब केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से फोन आया तो सभी के पांवों से मानो जमीन खिसक गई हो।

इस बुरी खबर पर किसी को यकीन नहीं हुआ कि उनके गांव का लाडला अब नहीं है। नारायण के घर के बाहर लोगों का मजमा लग गया। इनमें खासकर युवा बड़ी तादाद में थे, जो उन्हें अपना आदर्श मानते थे। देशसेवा में जाने की उनकी प्रेरणा को याद करके आंखें भर आईं। नारायण पढा़ई में बचपन से ही होशियार थे। उनमें शुरुआत से ही सेना में जाने का जज्बा था।

Updated on:
16 Feb 2019 08:58 am
Published on:
16 Feb 2019 08:39 am