राजसमंद झील के सर्वे का काम पूरा हो गया है। अब इसे जिला स्तरीय झील संरक्षण समिति में रखा जाएगा। वहां से स्वीकृत होने पर राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। वहां से इसका नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
राजसमंद. राजसमंद झील के सीमांकन के लिए सर्वे का काम पूरा हो गया है। नगर परिषद ने प्रस्ताव को सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के पास भेजा है। उसमें बताई गई कर्मियों को पूरा करने के बाद उक्त प्रस्ताव को जिला झील संरक्षण समिति की बैठक में रखा जाएगा। वहां से स्वीकृत होने पर राज्य सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां से झील का नोटिफिकेशन जारी होगा। राजसमंद झील का निर्माण 1662 से 1676 के बीच करवाया गया था। राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने जलाशयों पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए एवं उन्हें संरक्षित करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए जयपुर की एक फर्म से सर्वे करवाया गया था। सर्वे में झील पेटे में आ रहे खसरे, डूबक्षेत्र, भराव क्षमता सहित कई जानकारियां सामने आई। इसके पश्चात नगर परिषद के कार्मिकों ने मौके पर जाकर इनका स्वयं भौतिक सत्यापन किया। उक्त प्रस्ताव को बनाकर सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग को भेजा गया है। वहां पर इसकी जांच के पश्चात इसमें रही कमियों को बताया जाएगा। उनकमियों को दूर करने के पश्चात जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बैठक होगी। वहां पर प्रस्ताव को रखा जाएगा। इसके स्वीकृत होने की स्थिति में आपत्ति आमंत्रित की जाएगी। उक्त आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा। वहां से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही राजस्थान झील संरक्षण एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 2015 के तहत इसे संरक्षित किया जा सकेगा। इससे झील के विकास के लिए बजट आदि जारी हो सकेगा। इसे राष्ट्रीय झील प्राधिकरण को भेजा जाएगा।
: 1907 हेक्टेयर झील का डूब क्षेत्र
: 1970 हेक्टेयर झील का बफर एरिया
: 30 फीट झील का फुट टैंक लेवल
: 33 फीट अधिकतम वाटर लेवल
: 2500 से अधिक खसरे आ रहे जद में
: 2.82 किमी चौड़ाई और 6.4 किमी लम्बाई
: 1662 से 1676 के बीच झील का हुआ निर्माण
: राजसमंद झील संरक्षित हो सकेगी
: चारदीवारी और प्रोटेक्टेट एरिया बढ़ेगा
: झील के पेटे में अवैध निर्माण नहीं होंगे
: झील संरक्षण के लिए फंड मिल सकेगा
: निकाय को आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे
: झील की सुंदरता आदि के काम हो सकेंगे
राजसमंद झील के पेटे में कांकरोली, गुड़ली, वासोल, भगवानंदा कला, भगवंदा खुर्द, लवाणा, भाणा, किरणपुर, छापरखेड़ी, मोरचना, पसूंद, सेवाली, राजनगर, मंडावर गांव रूण राजसमंद अ और ब आदि आ रहे हैं। राजसमंद झील का फैलाव और लम्बाई एक समान नहीं है। इसके कारण इसके पेटे में करीब 2500 खसरे आ रहे हैं।
नगर परिषद सहायक नगर नियोजक निशा गोस्वामी ने बताया कि नगर परिषद की ओर से जयपुर की फर्म से डीजीपीएस सर्वे कराया गया। झील के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से एक मीटर अधिक बढ़ाकर एमडब्ल्यूएल (अधिकतम वाटर लेवल) लिया गया है। इससे झील के पेटे और इससे एकमीटर की दूरी तक झील संरक्षित रहेगी। इसका सर्वे आदि कराकर सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग को भेजा गया है।
नगर परिषद की ओर से राजसमंद झील के सीमांकन के लिए सर्वे आदि को सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग को भेजा गया है। वहां से बताई कमियों को पूरा कर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली झील संरक्षण समिति की बैठक में प्रस्ताव को रखा जाएगा।