राजसमंद

बदलते पर्यावरण का मिजाज सह नहीं पा रही मधुमक्खियां

कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल और मौसम की प्रतिकूलता से दम तोड़ रही मधुमक्खियां, पर्यावरण प्रेमियों ने जताई चिंता
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कुंवारिया कस्बे के सदर बाजार में आमेट रोड किनारे मधुमक्खियां और भंवर इन दिनों हजारों की संख्या में मरे हुए पाए गए। इससे पर्यावरणप्रेमियों में चिंता है। उन्होंने मौसम के लगातार बदलते मिजाज, कृषि कार्यों में बढ़ते कीटनाशकों के उपयोग और पर्यावरण की प्रतिकूलता को इसकी वजह बताया है।

कस्बे के एक तीन मंजिला मकान के ऊपरी हिस्से में मधुमक्खियोंं ने छत्ता बना रखा था। इस छत्ते से विगत 10 दिनों में सैकड़ों मधुमक्खियां हर रोज जमीन पर गिरकर तड़पते हुए दम तोड़ रही हैं। मधुमक्खियों के इस तरह मरने को लेकर पर्यावरणप्रेमियों ने चिंता व्यक्त की है।

पर्यावरणप्रेमी गिरिराज काबरा ने बताया कि बदलते मौसम व पर्यावरण की प्रतिकूलता के असर से मधुमक्खियां मर रही हैं। यह भी आशंका जताई कि संचार तकनीकी भी मधुमक्खियां मरने का कारण हो सकती है। संचार कंपनियों के टॉवरों के रेडिएशन से भी पर्यावरण पर नकारात्मक असर हो सकता है।

मधुमक्खियां नहीं रही तो पर्यावरण को होगा नुकसान
पर्यावरणप्रेमी महेन्द्र टांक ने बताया कि पर्यावरण की समृद्धि को बनाए रखने में मधुमक्खियों का महत्वपूर्ण किरदार होता है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि अगर किसी कारण पृथ्वी पर मधुमक्खियां समाप्त हो जाए तो कृषि एवं मानव का विकास बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। पर्यावरणप्रेमियों ने बताया कि कृषि कार्यों में बढ़ते कीटनाशकों के उपयोग व रेडियेशन से भ्रमर और मधुमक्खियों की प्रजनन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। इस कारण इनकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। कृषि में कीटनाशकों के सम्पर्क में आने से तथा विकिरण की तीव्रता के कारण इनके पंखों और शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे इनकी छत्ता निर्माण क्षमता कम हो जाती है और विकिरण के कारण ये मार्ग से भी भटक जाती हैं।

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बताया कि मधुमक्खियां और भ्रमर समाप्त होने से पर्यावरण व वनस्तपति के विकास पर सीधा पड़ता है। मधुमक्खियां फूलों से परागकण की निशेचन प्रक्रिया के तहत एक से दूसरे स्थान तक परिवहन में महत्वपूर्ण सहयोग करती है। मधुमक्खियां ही नहीं रहेंगी तो पुष्प के परागकण का निशेचन व परिवहन ठप हो जाएगा, जिससे पर्यावरण व कृषि कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ेगा।

इनका कहना है...

ग्लोबल वॉर्मिंग व पर्यावरण असंतुलन तो कारण है ही, साथ ही कृषि, फल व फूल उत्पादन के लिए पेस्टिसाइड जैसे कीटनाशकों का अंधाधुंध भी मधुमक्खियों के जीवन के लिए अधिक घातक है। मधुमक्खियों की संख्या जितनी अधिक घटेगी, उससे फल, फूल व फसल उत्पादन में बाधा उत्पन्न होगी। कृषि कार्यों में पेस्टिसाइड का उपयोग बहुत संयमित ढंग से करना चाहिए।
डॉ. शिवलाल चावला, पुष्प विज्ञान प्राध्यापक एवं विशेषज्ञ, नवसारी

Published on:
24 Feb 2024 12:05 pm