Online Education: इसके तहत सप्ताह में पांच दिन अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी ताकि स्कूली विद्यार्थियों को अध्ययन का लाभ मिल सकेगा।
राजसमंद। प्रदेश में राजकीय स्कूलों में परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने ई क्लासें लगाने का निर्णय किया है। इसके तहत सप्ताह में पांच दिन अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी ताकि स्कूली विद्यार्थियों को अध्ययन का लाभ मिल सकेगा।
इस संबंध में निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने निर्णय कर प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। राजस्थान शिक्षा विभाग और मिशन ज्ञान द्वारा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल कारगर साबित होगी। जिसके तहत सैकंडरी और सीनियर सैकंडरी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए ई-क्लासेस लगाई जाएंगी।
लाइव कक्षा सप्ताह में पांच दिन चलाई जाएगी। सोमवार से शुक्रवार तक चलने वाली कक्षाओं का समय 45 मिनट रहेगा। ये पाठशाला दिसंबर माह में शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को अध्ययन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
कहीं पर शिक्षक नहीं है, कहीं पर सुविधाओं का अभाव है। बिना तैयारी के बोर्ड परीक्षा में बैठना सरकारी विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। ऐसे में इन विद्यार्थियों का परिणाम निजी के मुकाबले बेहतर नहीं हो पाता था, लेकिन अब अतिरिक्त कक्षाओं के संचालन से सरकारी स्कूल के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में बेहतर अंक हासिल कर सकेंगे।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए ई-पाठशाला के माध्यम से अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। इसमें विद्यार्थियों को स्कूल में रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने घर पर बैठकर विषय विशेषज्ञों से पढ़ाई कर सकेंगे, और अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी उच्च अंक प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
●सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा में लाना
●सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाना है।
●विद्यालय समय के उपरांत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की ऑनलाइन लाइव कक्षा का लाभ विद्यार्थियों को उपलबध कराना।●विषय शिक्षक का पद रिक्त रहने अथवा शिक्षक के अवकाश पर रहने की स्थिति में विषय शिक्षण निरंतर रखना।
●विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षा परिणाम में गुणात्मक सुधार करना।
●विद्यार्थियों की विषयगत शंकाओं का समाधान करना।