राजसमंद

राजसमंद में मानवता की मिसाल; नंदनवन मोक्षधाम, जहां ‘कोई अपना नहीं’ तो भी मिलती है सम्मानजनक विदाई

Respectful Last Rites: राजसमंद: जिंदगी में हर इंसान चाहता है कि उसकी अंतिम यात्रा में अपने साथ हों, कंधा देने वाले लोग हों, आंखों में आंसू और विदाई में सम्मान हो। लेकिन जब कोई अपना नहीं होता, तब राजनगर का नंदनवन मोक्षधाम ऐसे बेसहारा लोगों का ‘अपना’ बनकर सामने आता है।
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नंदनवन मोक्षधाम, पत्रिका फोटो
नंदनवन मोक्षधाम, पत्रिका फोटो

Respectful Last Rites: राजसमंद: जिंदगी में हर इंसान चाहता है कि उसकी अंतिम यात्रा में अपने साथ हों, कंधा देने वाले लोग हों, आंखों में आंसू और विदाई में सम्मान हो। लेकिन जब कोई अपना नहीं होता, तब राजनगर का नंदनवन मोक्षधाम ऐसे बेसहारा लोगों का ‘अपना’ बनकर सामने आता है।

जिला मुख्यालय स्थित राजनगर नंदनवन मुक्तिधाम एक ऐसा स्थान बन चुका है, जहां मानवता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर दिन जीती-जागती दिखाई देती है। नंदनवन मोक्षधाम समिति ने एक बार फिर अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए एक अज्ञात लावारिस शव का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।

हिंदू रीति रिवाज से करते विदा

कांकरोली थाने से एसआई ओम सिंह का फोन जैसे ही मोक्षधाम के व्यवस्थापक प्रहलाद वैष्णव के पास पहुंचा, सूचना मिलते ही उन्होंने बिना देर किए शव को मोक्षधाम लाने की व्यवस्था करवाई। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और शव को राजनगर स्थित मोक्षधाम लाया गया।

यहां उस अज्ञात व्यक्ति को भी वही सम्मान मिला, जो किसी अपने को दिया जाता है। पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस सेवा कार्य में समिति के कोषाध्यक्ष कमलेश कोठारी, नगर परिषद के इंस्पेक्टर विनोद, गोपाल जमादार एवं अन्य कर्मचारियों ने भी सहयोग दिया।

विधि विधान से करते अंतिम संस्कार

समिति के सदस्यों का कहना है कि ऐसे हर मामले में वे मृतक को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। अंतिम यात्रा की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था वे स्वयं करते हैं, ताकि कोई भी इंसान इस दुनिया से बिना सम्मान के विदा न हो। इसी निस्वार्थ सेवा भावना का परिणाम है कि अब तक समिति के कमलेश कोठारी और प्रहलाद वैष्णव सहित अन्य सदस्यों ने 156 लावारिस और बेसहारा शवों का पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया है।

करते हैं निशुल्क सेवा

समिति की ओर से यह सेवा पूरी तरह निशुल्क प्रदान की जाती है, जिससे जरूरतमंदों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। आज जब समाज में रिश्तों की गर्माहट कहीं-कहीं कम होती नजर आती है, ऐसे में नंदनवन मोक्षधाम की यह पहल न सिर्फ मानवता की मिसाल है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि इंसानियत अब भी जिंदा है।

Updated on:
05 Apr 2026 10:54 am
Published on:
05 Apr 2026 10:53 am