राजसमंद

22 दिन की जंग के बाद मिली राहत: मार्बल उद्योग फिर लौटेगा पटरी पर

राजस्थान सरकार के अचानक 25% रॉयल्टी बढ़ाने के फैसले ने राजसमंद के विश्व प्रसिद्ध मार्बल उद्योग को गहरे संकट में धकेल दिया था।

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Marbel Agitation End

राजसमंद. राजस्थान सरकार के अचानक 25% रॉयल्टी बढ़ाने के फैसले ने राजसमंद के विश्व प्रसिद्ध मार्बल उद्योग को गहरे संकट में धकेल दिया था। खदानों से उत्पादन बंद हो गया, फैक्ट्रियों की मशीनों पर ताले पड़ गए और हजारों मजदूर रोज़ी-रोटी से महरूम हो गए। 22 दिन तक चले संघर्ष और हड़ताल के बाद आखिरकार शुक्रवार को सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच समझौता हुआ और उद्योग को आंशिक राहत मिली। सरकार ने रॉयल्टी में 40 रुपये की कमी कर दी है। अब मार्बल खदान मालिकों को प्रति टन 360 रुपये रॉयल्टी देनी होगी। इसके साथ ही खदानों से ब्लॉक डिस्पैच शुरू हो गया और बंद पड़ी फैक्ट्रियों में फिर से चहल-पहल लौटने की उम्मीद जगी है।

कैसे खड़ा हुआ संकट

  • पहले रॉयल्टी दर 320 रुपये प्रति टन थी।
  • सरकार ने इसे 25% बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया।
  • व्यापारी संगठनों ने इसे “उद्योग की कमर तोड़ने वाला फैसला” बताया और आंदोलन शुरू कर दिया।
  • लंबे विरोध और वार्ता के बाद सरकार ने 40 रुपये घटाकर इसे 360 रुपये प्रति टन कर दिया।

22 दिनों का संघर्ष

सरकार के नोटिफिकेशन (23 जुलाई) के बाद 1 अगस्त से खदानों से मार्बल डिस्पैच पूरी तरह बंद हो गया।

  • 19 अगस्त: व्यापारियों ने कलक्ट्रेट का घेराव किया।
  • 21 अगस्त:मोरचना में बैठक कर क्रमिक भूख हड़ताल का ऐलान किया गया।
  • 22 अगस्त सुबह: तीन व्यापारी अनशन पर बैठे।
  • 22 अगस्त शाम: सरकार ने आंशिक राहत दी और गतिरोध टूटा।

हड़ताल के दौरान 100 से ज्यादा गोदाम बंद रहे, हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए और ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह थम गई।

मजदूर और व्यापारी एकजुट

मजदूर संघों ने भी हड़ताल में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। उन्होंने किसी भी गाड़ी में माल भरने से इनकार कर दिया। यहां तक कि पहले से लोड हो रहे ट्रक भी खाली करवा दिए गए। इसका सीधा असर मजदूरों की रोज़ी पर पड़ा और हजारों परिवार आर्थिक संकट में आ गए।

सरकार और व्यापारियों की वार्ता

लगातार विरोध प्रदर्शनों के दबाव में सरकार को वार्ता की मेज पर आना पड़ा। विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ और दीप्ति माहेश्वरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने दलील दी कि पहले से ही विदेशी मार्बल, सेरेमिक टाइल्स, ग्रेनाइट और आर्टिफिशियल स्टोन से मार्बल उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे में अचानक रॉयल्टी बढ़ाना उद्योग को पूरी तरह चौपट कर देगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उद्योग को बचाना सरकार की प्राथमिकता है, जिसके बाद आंशिक राहत का रास्ता खुला। इस बैठक में कई बड़े संगठन और पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें उदयपुर मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज कुमार गांगावत, संरक्षक वीरमदेव सिंह कृष्णावत, राजसमंद माइन ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष गौरव सिंह राठौड़, गंगसॉ एसोसिएशन अध्यक्ष सत्यप्रकाश काबरा, केसरिया जी मार्बल एसोसिएशन के महेंद्र सिंह सिसोदिया, विजय सिंह राठौड़ और अरविंद सिंह राठौड़ शामिल रहे।

छोटे खंडों पर फैसला बाकी

  • मार्बल ब्लॉकों पर राहत जरूर मिली है, लेकिन छोटे खंडों पर रॉयल्टी का मुद्दा अब भी अनसुलझा है।
  • वर्तमान में इन पर रॉयल्टी 162 रुपये से बढ़ाकर 196 रुपये की गई है।
  • सरकार ने इस पर अलग समिति गठित की है, जो 45 दिन में रिपोर्ट पेश करेगी।

चुनौतियां अब भी कायम

हालांकि रॉयल्टी घटने से फिलहाल उद्योग को राहत जरूर मिली है, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।

  • विदेशी मार्बल और आर्टिफिशियल स्टोन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
  • उपभोक्ताओं की बदलती पसंद।
  • मजदूरों की बेरोजगारी और अस्थिर मांग।

स्पष्ट है कि मार्बल उद्योग को लंबी अवधि में स्थिरता और विकास के लिए सरकार और उद्योग जगत, दोनों को ठोस रणनीति बनानी होगी।

Published on:
23 Aug 2025 10:53 am
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