राजसमंद

जहां होते हैं संत वहां सोना, चले जाते हैं तो सूना-सूना : रितेश मुनि

मुनि ने शहर से किया विहार
less than 1 minute read
ritesh muni ka vihar
जहां होते हैं संत वहां सोना, चले जाते हैं तो सूना-सूना : रितेश मुनि

नाथद्वारा. जहां संत आते हैं वहां पर सोना-सोना हो जाता है और जहां से संत चल जाते हैं वहां का स्थान सूना-सूना हो जाता है।
यह विचार जैन श्रावक संघ के रितेश मुनि ने शहर से सोमवार को विहार करने के दौरान करजिया घाटी स्थित एक मार्बल इकाइ में प्रवचन के दौरान संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य इमानदारी से त्याग, तपस्या करके अपने गुरु को याद रख सकता है एवं अपने जीवन को सफल बनाने के लिए इसी क्रम पर चलता है तो उसे सदैव सफलता ही मिलती है। इस अवसर पर सहवृत प्रभात मुनि ने कहा कि इस संसार में मनुष्य सबसे मिलता- बिछड़ता रहता है, लेकिन मनुष्य का अच्छा व्यवहार सदा याद रहता है। इस दौरान राकेश भडक़तिया, इन्द्रमल सुराणा, रणजीत बोहरा, संजय सिंयाल, चेतन छाजेड़, हिम्मत लोढ़ा, संपत डागलिया, भगवती लाल सिंघवी, पुष्पा सिसोदिया, सरोज लोढ़ा, छाया लोढ़ा, गौतम राठोड़, प्रगति शाह उपस्थित थे। इससे पूर्व दोनों मुनियों ने सोमवार प्रात: के समय शहर के बस स्टैण्ड के पास स्थित कॉलोनी से राजसमंद के लिए विहार किया। मार्ग में कई जगह श्रावक-श्राविकाओं ने उनका स्वागत किया।

Published on:
17 Dec 2018 08:10 pm