
भारत सरकार के तेल और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आदेश पर यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें सभी गैस धारक उपभोक्ताओं को अपनी गैस की डायरी को आधार से लिंक करवाना होगा। यह सुविधा गैस एजेंसी संचालकों की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है। स्थिति यह है कि अभी भी एक ही घर में एक ही नाम से कई गैस कनेक्शन चल रहे हैं। वैरीफिकेशन के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी। कनेक्शनों के नाम पर चल रहा फर्जीवाड़ा भी रूकेगा। हालांकि अभी इसकी अंतिम तिथि तय नहीं हैं।
यह होगा फायदा
अब ई केवाईसी से अवैध कनेक्शनों का फर्जीवाड़ा रुकेगा। आधार से लिंक होने के बाद अवैध कनेक्शनों की पहचान करने में आसानी होगी। ईकेवाईसी होने के बाद योजना का गलत उपयोग भी रुकेगा। आधार प्रमाणीकरण से स्थिति सुधर जाएगी। कई ऐसे भी मामले हैं, जिसमें गैस कनेक्शन जिनके नाम से हैं, उनकी मौत हो चुकी, फिर भी सिलेंडर मिल रहे हैं।
जिले में 2 लाख से अधिक गैस कनेक्शन
जिले में विभिन्न गैस एजेसिंयों के दो लाख से अधिक उपभोक्ता है। एजेंसी संचालकों की मानें तो जिले में अब तक 86 हजार से अधिक गैस उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी हो चुकी है, जबकि अभी भी एक लाख 20 हजार के करीब उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी होना बाकि है। हालांकि अभी इसकी अंतिम तय नहीं की गई है।
एजेंसी पर हो रहा प्रमाणीकरण
गैस उपभोक्ताओं को संबंधित एजेंसी पर जाकर आधार प्रमाणीकरण करवाना होगा। इसके लिए एजेंसियों की ओर से उपभोक्ताओं को मैसेज भेजे जा रहे हैं। गैस कनेक्शन से बैंक की खाता संख्या पहले से जुड़ी हुई है, जिनके बैंक खाता संख्या नहीं जुड़े हुए है वे आधार से लिंक होने के बाद जुड़ जाएंगे। अगर किसी ने दो जगह फायदा लिया है तो आधार से उसका पता चल जाएगा।