
जिले में करीब 1800 अधिक मार्बल, ग्रेनाइट, फेल्सपार और क्वाट्र्स की खदान है। मार्बल और ग्रेनाइट की माइंस में ब्लॉक निकलते हैं। उन ब्लॉक को गैंगसा और कटर के माध्यम से स्लेब तैयार किया जाता है। इनकी कटिंग के दौरान मार्बल और ग्रेनाइट की स्लरी निकलती है। उक्त स्लरी के लिए कई स्थानों पर डम्पिंग यार्ड बना रखे हैं, लेकिन कई टेक्ट्रर चालक रात्रि के समय स्लरी को भरकर डम्पिंग यार्ड में डालने के स्थान पर खुली जगह अथवा खाली प्लॉट में डाल देते हैं। इसके साथ ही कुछ लोग जमीन की भर्ती में इसका काम ले रहे हैं। इसके कारण नगर परिषद क्षेत्र के कई स्थानों पर स्लरी भरी हुई दिखाई देने लगी है। इससे जमीन के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसके बावजूद राजस्थान राज्य प्रदूषण विभाग, नगर परिषद सहित जिला प्रशासन भी इस और ध्यान नहीं दे रहा है। इसके कारण इनके हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं।
फैक्ट फाइल (जिले में)
- 350 गैंगसा संचालित
- 800 मार्बल के कटर
- 750 ग्रेनाइट कटर
खदान एक नजर
- 959 मार्बल की माइंस
- 189 ग्रेनाइट की माइंस
- 319 क्वाट्स की खदान
- 376 फेल्सपार खदान
यह हुआ उत्पादन
- 42 लाख टन करीब मार्बल का उत्पादन
- 17.50 लाख टन करीब ग्रेनाइट का उत्पादन
मार्बल स्लरी से यह होता नुकसान
- जमीन का उपजाऊपन खत्म हो जाता है
- आस-पास की फसलों को नुकसान पहुंचता
- मार्बल स्लरी में मवेशी फंसकर मर जाते
- स्लरी से भूमिगत जल भी दूषित होता है
यह हो सकता उपयोग
- स्लरी में प्रचुर मात्रा में होता है कैल्शियम
- स्लरी का सीमेंट फैक्ट्रियों में होता उपयोग
- मुर्गी दाने में कैल्शियम के रूप आता काम
- रंग-रोगन, वॉल पुट्टी बनाने के आती काम
- टाइल्स बनाने में होता है स्लरी का उपयोग
साधारण सभा में गूंजा मुद्दा
नगर परिषद की साधारण सभा में विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने नगर परिषद के अधिकारियों से पूछा की जे.के.मोड ुुपुलिया के किनारे खाली जमीन में स्लरी डाली जा रही है। बारिश के दौरान यह बहकर रोड पर आएगी इससे दुर्घटना हो सकती है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा, तो नगर परिषद के अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने तुरंत उक्त स्थान से मार्बल स्लरी हो हटवाने के निर्देश दिए थे।
खुले में अथवा प्लॉट में स्लरी डालना गलत
मार्बल और ग्रेनाइट की स्लरी को खुले में अथवा प्लॉट आदि में नहीं डाला जाना चाहिए। इसके लिए डम्पिंग यार्ड बने हैं वहां पर इसे डाला जाना चाहिए। इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।
- रवि शर्मा, अध्यक्ष मार्बल गैंगसा एसोसिएशन राजसमंद
पर्यावरण, जीव-जंतु और सभी को है नुकसान
पडत जमीन (खाली) पर स्लरी डाली जाती है तो उस स्थान और उसके आस-पास के कुछ क्षेत्र में कोई भी वनस्पति पनक नहीं सकेगी। इसके साथ ही छोटे-छोटे छिद्रों से पानी का जमीन में रिसाव होता है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ता है वह पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जीव-जतुंओं को भी नुकसान होगा। इससे पारिस्थितिक तंत्र भी गड़बड़ा सकता है।
- डॉ. विश्वनाथ नंदी, कृषि अनुसंधान अधिकारी मृदा विज्ञान, राजसमंद